शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए : शोभित
आज कल एक बड़े पीठाधीश्वर की आक्समयिक मौत से लोग हतप्रभ है, होना भी चाहिए सनातनी परम्परा के जो लोग अपने जीवन को ईश्वरीय व्यव्यस्था से जोड़े है उनके आक्समयिक देहावसान पर दुख भी होता है। क्षोभ भी। कि क्या शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए। शास्त्र भी कहते है। शत्रु से कड़ी शर्तो पर भी … Continue reading शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए : शोभित
