शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए : शोभित

आज कल एक बड़े पीठाधीश्वर की आक्समयिक मौत से लोग हतप्रभ है, होना भी चाहिए सनातनी परम्परा के जो लोग अपने जीवन को ईश्वरीय व्यव्यस्था से जोड़े है उनके आक्समयिक देहावसान पर दुख भी होता है। क्षोभ भी। कि क्या शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए। शास्त्र भी कहते है। शत्रु से कड़ी शर्तो पर भी … Continue reading शिष्य बनकर हम कुछ सीखने सुधरने जाते है या इच्छाओं की अनवरत पूर्ति के लिए : शोभित

सेवा भारती की नई कार्यकारिणी घोषित

सीतापुर। सेवा भारती की बैठक स्थानीय बट्सगंज स्थित कैम्प कार्यालय में सम्पन्न हुई। जिसमें रवीन्द्र कुमार गंगवार प्रान्तीय अध्यक्ष अवध प्रांत लखनऊ के अनुमोदन के उपरान्त सर्वसम्मति से कार्यकारिणी का मनोनयन अवध प्रान्तीय कोषाध्यक्ष सुभाष चन्द्र गुप्ता की अध्यक्षता में कराया गया। मनोनयन के क्रम में संरक्षक सुन्दर लाल, भानु प्रताप सिंह, विश्ववीर गुप्ता, पूरन सिंह, खेम चन्द्र डोडेजा, अध्यक्ष अवनेन्द्र विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष वेद … Continue reading सेवा भारती की नई कार्यकारिणी घोषित

कपड़े रंगने से हम आद्यात्मिक नही होते, सूट टाई में भी हम जीवन को निर्लिप्त भाव से जी सकते है : शोभित

आज अजीब वक्त है लोग पहचान के चक्कर में अपने को ही गुम किये है। कहीं न कहीं व्यक्तित्व की कमी, हमारा खाली पन शोभित चिंन्तन की कमी से हम दर बदर भटकते रहते है। आज वक्त है प्रदेश से ऊपर उठकर राष्ट्रीय स्तर की नेता गिरी का वो भी जब हम उस लायक नही। मजा तब आता है जब हिन्दू किसी संघटन से जुड़ते … Continue reading कपड़े रंगने से हम आद्यात्मिक नही होते, सूट टाई में भी हम जीवन को निर्लिप्त भाव से जी सकते है : शोभित

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी: शोभित

नकारात्मक, सकारात्मक हम किताबो में पढ़ते हैं,भाषणों में सुनते हैं। लेकिन शोभित चिंन्तन जाग्रत नही कर पाते। वजह दिल मे बैठा पाना और बोलना दो अलग अलग तरीके है जिंदगी को समझने के। अक्सर हम जिंदगी के मूल स्वरूप से बिल्कुल जुदा हो जाते है। मान, ज्ञान और धन के पीछे सोच केंद्रित होकर ठहर जाती है।पीछे एक घुप्प अंधेरा दृष्टिगोचर होता है। लेकिन अरे … Continue reading हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी: शोभित

जीवन जिस संसार मे चल रहा है.. वह रोडवेज बस की तरह है : शोभित

जीवन जिस संसार मे चल रहा है। शोभित चिंन्तन से देखे वह रोडवेज की बस की तरह है। टिकट सब लिए होते है, लेकिन जो सीट पा जाता है वह गंतव्य तक के लिए उस सीट का मालिक समझने लगता है। यही संसार मे होता है। हम अपनी छोटी सोच के माया जाल में फंसे फंसे अंत कर लेते है। उस खुदा या परमात्मा को … Continue reading जीवन जिस संसार मे चल रहा है.. वह रोडवेज बस की तरह है : शोभित