अम्मा की बातें हवा हवाई, तो वहीं नगर आयुक्त भी बने ठंडी हवा का झोंका
कानपुर: स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रमिला सभागार में बड़े जोर-शोर से शुरू किया गया था ‘टोकोगे तो रोकोगे’ अभियान भी अन्य अभियानों की तरह सिर्फ कागज़ी साबित होता नजर आ रहा है। कानपुर नगर निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बाद जमीनी हकीकत अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। ZSO स्तर से लेकर संबंधित अधिकारियों तक, कहीं भी सफाई व्यवस्था को लेकर सुनवाई नहीं हो रही है।
कई वार्डों की गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं, नालियां जाम होकर बदबू फैला रही हैं और आम जनता परेशान होकर शिकायत दर शिकायत कर रही है,लेकिन सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त है बल्कि चुप्पी साधे हुए है।
सबसे गंभीर बात यह है कि रसूखदारों के दबाव में कर्मचारियों की तैनाती और हटाने का खेल भी जारी है, जिससे सफाई व्यवस्था और चरमरा गई है। महापौर प्रमिला पांडेय ‘अम्मा जी’ के वादे पहले भी सवालों के घेरे में रहे हैं, और अब एक बार फिर शहर की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।
अभियान के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाकर शहर को गंदगी के हवाले कर दिया गया है,जिससे ‘स्वच्छता’ के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
रिपोर्ट- अमित कुमार, कानपुर
