“न काशी निषाद को भूल सकती है, और ना निषाद काशी को” : राजीव यादव

लखनऊ। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल “निषाद पार्टी” द्वारा प्रदेश के चार प्रमुख स्थानों—वाराणसी, नोएडा, प्रयागराज एवं गोरखपुर—पर व्यापक जनसंपर्क एवं संगठनात्मक कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। इसी क्रम में आगामी 01 मई 2026 को वाराणसी में निषाद पार्टी का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद स्वयं सक्रिय रूप से समीक्षा कर रहे हैं। वे वाराणसी, मिर्जापुर एवं आजमगढ़ मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों की तैयारियों की गहन समीक्षा कर रहे हैं, जिससे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया जा सके।मंत्री संजय निषाद के जनसंपर्क अधिकारी राजीव यादव नें एक लेख के द्वारा बताया कि संगठन की समीक्षा बैठकों के दौरान डॉ. संजय निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश के मछुआ समुदाय के लिए किए गए कार्यों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु लगभग 67 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जिससे मछुआ समाज को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई शक्ति मिली है। इसके विपरीत, उन्होंने पूर्ववर्ती 70 वर्षों की सरकारों द्वारा इस क्षेत्र में मात्र लगभग 3 हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख करते हुए अंतर को स्पष्ट किया। डॉ. निषाद ने कहा कि प्रधानमंत्री सदैव मछुआरों के हितों के प्रति संवेदनशील रहे हैं और वे आम मछुआरे के जीवन, संघर्ष और पीड़ा को भली-भांति समझते हैं।

अपने आगामी कार्यक्रमों को लेकर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि मझवार/तुरैहा आरक्षण का मुद्दा निषाद पार्टी का मूल और प्रमुख मुद्दा है। इस विषय पर पार्टी ने कभी समझौता नहीं किया है और आगे भी नहीं करेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज के समग्र विकास के लिए केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण और मुख्यधारा से जुड़ाव भी अत्यंत आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण से केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा मछुआ समाज के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं— जिनसे हजारों परिवारों को रोजगार एवं स्थायी आय के अवसर प्राप्त हुए हैं और समाज आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहा है।

राजीव नें आगे कहा कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश के चारों स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। कुछ लोगों द्वारा इन कार्यक्रमों को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, किंतु उन्होंने स्पष्ट किया कि निषाद समाज अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन पहले ही विधानसभा चुनाव 2022 में कर चुका है। उन्होंने संगठन की मजबूती को एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार नाव को नदी में उतारने से पूर्व उसके सभी दोषों (लूपहोल), कील-कांटे और कमजोरियों को ठीक किया जाता है, उसी प्रकार संगठन को भी समय-समय पर परखा और मजबूत किया जाना आवश्यक होता है।डॉ. निषाद ने वाराणसी के साथ निषाद समाज के गहरे आध्यात्मिक एवं आत्मीय संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि वाराणसी और निषाद समाज एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं—“न वाराणसी निषाद को भूल सकता है और न निषाद वाराणसी को।

”उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी काशी के घाटों से ही अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की शुरुआत हुई थी। उस समय निषाद समाज के वीर लोगों ने अपने साहस और रणनीति से अंग्रेजों का मुकाबला किया और कई स्थानों पर उन्हें पराजित किया। आजादी का स्वतंत्रता संग्राम इस ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है। इसी प्रेरणा के साथ 01 मई को वाराणसी में निषाद समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर अपने समाज की समस्याओं, अधिकारों और संगठन की मजबूती पर विचार करेंगे।उन्होंने आह्वान किया कि जिस प्रकार 1857 में देश को स्वतंत्र कराने की पहली चिंगारी काशी से उठी थी, उसी प्रकार आज निषाद समाज प्रधानमंत्री एवं एनडीए को सशक्त करने तथा मछुआ समाज विरोधी और देश विरोधी ताकतों को परास्त करने के लिए एकजुट होकर संकल्प लेगा।

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