मौन व्रत में नैमिषारण्य पहुंचे शंकराचार्य, ‘गाय को राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की उठी मांग

नैमिषारण्य (सीतापुर)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य पहुंचे, जहां उन्होंने मौन व्रत का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। उनके सानिध्य में शिष्यों और संतों ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए इस पवित्र भूमि को ऋषि-मुनियों की तपोस्थली और ज्ञान की धरती बताया।धर्मसभा में वक्ताओं ने कहा कि नैमिषारण्य वह स्थान है जहां व्यक्ति अपने कर्मों के आधार पर पुण्य और पाप अर्जित करता है। पौराणिक दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है और अनेक धार्मिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।

शंकराचार्य ने यहां पहुंचकर सबसे पहले शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने पवित्र चक्रतीर्थ पर होने वाली आरती में भी भाग लिया।

धर्मसभा में संतों ने गौरक्षा के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग दोहराई। साथ ही आगामी दिनों में लखनऊ में आयोजित होने वाली धर्मसभा में अधिक से अधिक लोगों को शामिल होने का आवाहन किया गया।धर्माचार्यों का कहना है कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और उसकी रक्षा व सम्मान के लिए व्यापक जनजागरण आवश्यक है।

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