हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी: शोभित
नकारात्मक, सकारात्मक हम किताबो में पढ़ते हैं,भाषणों में सुनते हैं। लेकिन शोभित चिंन्तन जाग्रत नही कर पाते। वजह दिल मे बैठा पाना और बोलना दो अलग अलग तरीके है जिंदगी को समझने के। अक्सर हम जिंदगी के मूल स्वरूप से बिल्कुल जुदा हो जाते है। मान, ज्ञान और धन के पीछे सोच केंद्रित होकर ठहर जाती है।पीछे एक घुप्प अंधेरा दृष्टिगोचर होता है। लेकिन अरे … Continue reading हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी: शोभित
