अनुभूति ही इच्छा की एक ब्रांच है : शोभित
शिकायतों और दुआओं में जब एक ही शख्स हो, समझ लो इश्क इबादत के मुकाम पर है। शोभित चिंन्तन यहीं है। संसार का कर्ता धर्ता एक। फिर हम उसे भूले इधर उधर भटकते रहते है। न रास्ता मिलता है न मंजिलजीवन मे इसी दौड़ भाग में दुख की अनुभूति छुपी होती है। अनुभूति ही दुख का कारण है। जिनके अनुभूति की बीमारी नही होती वह … Continue reading अनुभूति ही इच्छा की एक ब्रांच है : शोभित
