अनुभूति ही इच्छा की एक ब्रांच है : शोभित

शिकायतों और दुआओं में जब एक ही शख्स हो, समझ लो इश्क इबादत के मुकाम पर है। शोभित चिंन्तन यहीं है। संसार का कर्ता धर्ता एक। फिर हम उसे भूले इधर उधर भटकते रहते है। न रास्ता मिलता है न मंजिलजीवन मे इसी दौड़ भाग में दुख की अनुभूति छुपी होती है। अनुभूति ही दुख का कारण है। जिनके अनुभूति की बीमारी नही होती वह … Continue reading अनुभूति ही इच्छा की एक ब्रांच है : शोभित

कैसे यकीन कर लूं कि फिर आइयेंगा आप, आ भी गए तो मुझको कहाँ पाइयेगा आप, ये दिल है इसको तोड़ के पछताइयेगा आप, आइना देखने को तरस जाइयेगा आप : शोभित

खुदा भी असीम ताकत रखता है, शरीर मे अनेकों मशीनें फिट कर दी है, सब एक दूसरे से इन्टरकनेटटेड है। ऐसे ही शरीर मे आंखों में छुपे आंसू होते है। शोभित चिंन्तन से देखे न जाने कहाँ छिपे रहते है। कब बहने लग जाए।कभी खुशी में, कभी दुख में, कभी क्षोभ में, कभी एहसास से, कभी दूरी से, कभी ठगे जाने से, कभी सब कुछ … Continue reading कैसे यकीन कर लूं कि फिर आइयेंगा आप, आ भी गए तो मुझको कहाँ पाइयेगा आप, ये दिल है इसको तोड़ के पछताइयेगा आप, आइना देखने को तरस जाइयेगा आप : शोभित

एक ऐसी भंवर की तरफ परिवार जा रहे है जहाँ डूबना ही डूबना है – शोभित

आज संसार के खुशी दिखने के पीछे का दर्द लोग देख नही पा रहे, न जाने कितने परिवार रिस्ते घमंड के घाव के नीचे जीने को विवश है। शोभित चिंन्तन से देखे पहले कम पढ़े लिखे लोगो मे यह शायद कम होगा। आज सुरक्षित भविष्य की सोचते सोचते खुद को लोग असुरक्षित करने की दिशा में तैर रहे है। एक ऐसी भंवर की तरफ परिवार … Continue reading एक ऐसी भंवर की तरफ परिवार जा रहे है जहाँ डूबना ही डूबना है – शोभित

संसार मे विभिन्न विचारो के लोग विद्यमान है- शोभित

जीवन मे, संसार मे, भाव मे, भाव विहीन में, समय से, समय से बाहर, मतलब से, बिना मतलव के, अपने से, या गैरो से, बात और भाव विभिन्न विचारो के प्रस्फुटन का कारण और फिर शोभित चिंन्तन उसका निवारण होता है। निवारण भी है क्या। निवारण मात्र यह कि हम अपने को देख पाए, समझ पाए, जीवन के व्यतीत पलों से कुछ समझ पाए। संसार … Continue reading संसार मे विभिन्न विचारो के लोग विद्यमान है- शोभित

अँहकार अक्सर लोगो की जिंदगी में उलझने पैदा कर देता है – शोभित

शोभित चिंन्तन से देखे तो कोई सुरक्षित भविष्य के कारण, कोई कुछ नही सड़क छाप है। वह भी गर्दन ताने है।मूलतः यही जीवन के सुखों पर दुखो का कारण है।यह अहंकार खत्म भी नही होता। वजह हम अंदर से खुदा से दूर ही होते है। यह अहंकार दुखो का मूल है, लेकिन ज्ञानी हो या ध्यानी या फटीचर जान कोई नही पाता। खैर इसका कोई … Continue reading अँहकार अक्सर लोगो की जिंदगी में उलझने पैदा कर देता है – शोभित