क्या भारत एक स्वस्थ युवाओं का देश भी है?

वर्तमान भारत जिसके विषय में हम गर्व से कहते हैं कि यह एकयुवा देश है, क्या हम उसके विषय में यहभी कह सकते हैं कि भारत स्वस्थ युवाओं का देश है?यह प्रश्न अनायास नहीं है अपितु यह प्रश्न उन सर्वेक्षणोंके आधार पर है जिनमें हमारे बच्चों में टाइप 2 मधुमेह के बढ़ते मामलों का गम्भीर विषय सामने आया है । कभी वयस्कों में देखी जाने … Continue reading क्या भारत एक स्वस्थ युवाओं का देश भी है?

नवरात्र मात्र उपवास और कन्याभोज नहीं है ।

चैत्र मास की शुक्लप्रतिपदा यानी नव संवत्सर का आरम्भ। ऐसा नववर्ष जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि में एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा होता है। एक तरफ पेड़ पौधों में नई पत्तियां और फूल खिल रहे होते हैं तो मौसम भी करवट बदल रहा होता है। शीत ऋतु जा रही होती है, ग्रीष्म ऋतु आ रही होती है और कोयल की मनमोहक कूक वातावरण में रस … Continue reading नवरात्र मात्र उपवास और कन्याभोज नहीं है ।

परिप्रेक्ष्यों का टकराव: मीडिया, राजनीति और सार्वजनिक राय की जटिलता

जब भी पत्रकरिता, समाचार, रिपोर्टिंग की बात आती है, तो हर किसी को खुश करना एक असंभव कार्य है। प्रत्येक समाचार, ख़बर, लेख, रिपोर्ट, कहानी के अपने आलोचक और समर्थक होते हैं। जब कोई खबर सरकार के पक्ष में होती है तो विपक्ष उसे पक्षपातपूर्ण मानता है, जबकि सरकार को चुनौती देने वाली खबर को निष्पक्ष मानकर उसकी सराहना की जाती है। मीडिया, राजनीति और … Continue reading परिप्रेक्ष्यों का टकराव: मीडिया, राजनीति और सार्वजनिक राय की जटिलता

सत्य का क्षरण: राजनीतिक समाचारों से जुड़ा कलंक और पत्रकारिता पर इसका प्रभाव

सूचना अधिभार और तीव्र राजनीतिक ध्रुवीकरण के प्रभुत्व वाले युग में, पत्रकारिता के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। दुर्भाग्य से, एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति सामने आई है: राजनीतिक समाचार पत्रकारिता के क्षेत्र में एक कलंक बन गए हैं। इस घटना की विशेषता उन पत्रकारों की निरंतर जांच है जो राजनीतिक मामलों पर सच्चाई से रिपोर्ट करते हैं, जिसमें प्रत्येक पक्ष दूसरे पर … Continue reading सत्य का क्षरण: राजनीतिक समाचारों से जुड़ा कलंक और पत्रकारिता पर इसका प्रभाव

दसवीं मोहर्रम पर विशेष : यौमे आशूरा की अहमियत व फजीलत

यौमे आशूरा के दिन करे अल्लाह की खूब इबादत रमजान के बाद सबसे अफजल रोजे अल्लाह के महीना मुहर्रम के रोजे हजरत हुसैन रजी. ने हक की खातिर अपनी जान को अल्लाह की राह में नछावर कर दिया लेकिन बातिल के सामने सर नहीं झुकाया रियासत अली सिद्दीकी इस्लामी नुक्ते नजर से यौमे आशूरा की बड़ी फजीलत बयान की गई है। वैसे तो मुहर्रम-उल-हराम का … Continue reading दसवीं मोहर्रम पर विशेष : यौमे आशूरा की अहमियत व फजीलत