आचार्य नरेन्द्र देव टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज करेगा आयोजन।
सीतापुर: जनपद के आचार्य नरेंद्र देव टीचर ट्रेनिंग कॉलेज सीतापुर में 18 व 19 फरवरी को जनजातीय विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का प्रकल्प होगा। जिसको लेकर आचार्य नरेंद्र देव टीचर ट्रेनिंग कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या प्रोफेसर प्रनीता सिंह व कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर सुनील कुमार ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
प्रकल्प संयोजक प्रोफेसर सुनील कुमार ने बताया भारत बहु जातीय, बहु-सांस्कृतिक, बहु- धार्मिक लोगों की भूमि है। भारत की कुल जनसंख्या में जनजातीय समुदाय की हिस्सेदारी 8.6ः है (जनगणना, 2011) जिसका अर्थ है कि भारत 10.42 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों का घर है। आदिवासी लोग भारत के आदिम निवासी हैं। वे फसल उत्पादन, पशुधन उत्पादन, बागवानी और फसल कटाई के बाद के कार्यों सहित प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक संपत्तियों और कृषि विकास के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन आजादी के 75 से अधिक पांच वर्षों के बाद भी, वे निम्न स्तर का जीवन जी रहे हैं। और भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी विकासात्मक योजनाओं और लाभों के सबसे कम लाभार्थी बने हुए हैं। वे अभी भी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं जो उनकी प्रगति और विकास में बाधा डालती हैं जैसे गरीबी, शैक्षिक समस्याएं, भूमि समस्याएं, स्वास्थ्य समस्याएं, नक्सलवाद, बच्चों का शोषण, अक्षम प्रशासन और शासन। इसलिए, इन समूहों को मुख्यधारा में शामिल करने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए, जनजातीय मामलों का मंत्रालय भारत में इन समुदायों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम तैयार कर रहा है। अपने कुल के उत्थान समय-समय पर राष्ट्र के व आदिवासियों को विभिन्न सुविधाजनक प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर प्रनीता सिंह ने बताया जनपद सीतापुर के आचार्य नरेंद्र देव टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के लिए यह गौरव का विषय है कि यह महत्वपूर्ण है कि भारत में आदिवासियों की स्थिति में काफी सुधार होना चाहिए ताकि उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत किया जा सके।
आदिवासियों को गैर आदिवासियों के शोषण से बचाया जाये। आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए, पारिस्थितिकी को बचाने और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जनन में आदिवासियों को शामिल करने की आवश्यकता है। आदिवासियों के एकीकृत विकास के लिए विकास के प्रति समग्र एवं समन्वित दृष्टिकोण और उनकी सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। इस तरह के विकास से उनमें आत्मनिर्भरता, आत्म-समर्थन और आत्म-सम्मान पैदा होता है। जाहिर है कि आदिवासी विकास के पूरे सवाल पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। इस प्रकार यह मुद्दा वर्तमान समय में सबसे अधिक प्रासंगिक है। आदिवासी समुदाय के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए चर्चा की जरूरत है। यह सेमिनार आदिवासी सशक्तिकरण और विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए एक उपयुक्त मंच होगा।उद्घाटन सत्र मुख्य अतिथि डा0 कल्याण सिंह रावत मैती, पदम श्री, पर्यावरणविद, देहरादून, उत्तराखंड, प्रो रमेश एच मकवाना, भारतीय शिक्षाविद, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, आनंद गुजरात, अध्यक्षता प्रो0 एन0एन0 पांडेय, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष, शिक्षा संकाय, एम0जे0पी0 रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, प्रो0 दिनेश कुमार, संकायाध्यक्ष, लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रो0 शुभजीत चक्रवर्ती, असम, प्रो0 वैभव सबनीश, महाराष्ट्र, समापन सत्र के मुख्य अतिथि कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ सहित देश के विभिन्न प्रांतों से प्रतिभागिता होगी।
