रियासत अली सिद्दीकी (विशेष संवाददाता)
रामकोट-सीतापुर। समाज मे धर्म के नाम पर एक-दूसरे को लड़ाने वाले बहुत है लेकिन आपसी भाई चारे को कायम रखकर एकता की मिसाल पेश करने वालो की भी कमी नहीं है। सीतापुर जिले से हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल एक मुस्लिम परिवार ने पेश की है। इनका यह कदम जहां हिन्दू-मुस्लिम की एकता को बल देता है वहीं धर्म के नाम पर कट्टरपंथी फैलाने वालों को करार जबाव भी। इनका यह कदम इंसानियत को बढ़ाने वाला है।
आज हम आपको इस जिले के ऐसे मुस्लिम परिवार से मिलवाते है जो कट्टरपंथियों की सोच पर करार तमाचा हैं। सीतापुर जिले के मछरेहटा कस्बा निवासी मो. फारुख के बेटे फरीद अहमद, मुकीद अहमद, अकीद अहमद, समीर, मो. शमी, पोता आतिफ, बीबी, बेटी व बहूओं सहित पूरे परिवार ने रक्षाबंधन के मौके पर कस्बे की हिन्दू बहनें आरती राठौर, सावित्री राठौर से अपने हाथों पर राखी बंधवा कर इंसानियत के बीच खड़ी धर्म की दीवार को चूर कर दिया। कस्बे में पिछले 15 साल से राखी बांध रही ये हिन्दू बहन अपने मुस्लिम भाइयों को शादी हो जाने के बाद ससुराल से अपने मुस्लिम भाइयों व मुस्लिम परिवार को राखी बांधने आईं। जिनका यह कदम हिन्दू-मुस्लिम एकता के बीच एक मजबूत रिश्ते की मिसाल है। यदि कट्टरपंथी समाज मे नफरत की दीवार खड़ी करते हैं तो इन जैसे लोग इस दीवार को तोड़कर इंसानियत की मिसाल बनते हैं। सीतापुर की नगरी वैसे भी आपसी प्रेम और भाईचारे की मिसाल ही रही है। ये धरती हमेशा शहीदे आज़म अशफ़ाक़ उल्ला खां और पं. रामप्रसाद बिस्मिल की मित्रता के लिए जानी जाती है।
