इंसान कठपुतली की तरह नाच रहा है, न चाहते हुए भी रिश्तों को ढोने के लिए विवश है : शोभित

जीवन एहसास और मुखनन्स लोगो के बीच रचा तिलिस्म है। जिसमे मुस्कराहटों के साथ आह भी जुड़ी होती है।

आज के शोभित चिंन्तन के स्टेस्टस में हमने लिखा भी है आज 28 सितम्बर को। किसी के प्रति एहसास की मौजूदगी उसके स्नेह की मानक होती है, एहसास से शून्य होने पर उसका महत्व भी लगभग खत्म हो जाता है।

हमारी पोस्ट में बातों में सभी को डायलॉग्स दिखते होंगे, सामान्य बोलचाल में भी डायलॉग्स मिलते होंगे, लिखते समय सोच कर नही लिखते, स्टेस्टस सोच कर नही लिखते एक बार लिखना शुरू किया तो कुछ बेहतर लिख ही जाता है।

मुझे लगता है बेहतरीन शब्दो का चयन का गुण मुझे मेरी मां से ट्रांसफर हुआ है।

शोभित चिन्तन से देखे इंसान कठपुतली की तरह नाच रहा है । न चाहते हुए भी रिश्तों को ढोने के लिए विवश है।

एक शेर है। जरूरत मुझे एक तवायफ की तरह नचाती है, इतना काम तो मशीनें भी नही करती।।

यही जीवन की चक्कर पे चक्कर की घुमनी है। जीवन तब और बिताया नही जाता जब एहसास भी न महसूस हो अपनो के बीच।

शोभित पोस्ट एक शेर से बिराम।

मेरी उजड़ी हुई आंखों को सारे ख्बाब लौटा दो,
अमानत में ख़यामत तो जमीनें भी नही करती।

शोभित टण्डन, सीतापुर

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