मुखालफत से मेरी शख्सियत संवरती है, दुश्मनों का मैं बहुत एहतराम करता हूं: शोभित

शोभित चिंन्तन पुराने गानों की लाइनों से जोड़ते हुए संसार को समझने का प्रयास को समझते हुए।

ये दिल तुम बिन कहीं लगता नही हम क्या करें। मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज न होना कि तुम मेरी जिंदगी हो, कि तुम मेरी बन्दगी हो।

जीवन संचालन के लिए ईश्वर ने जन्म बचपन युवा होते और बृद्ध होते हुए की व्यवस्था को बनाया है। जीवन के अनन्त पड़ाव से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बृद्धावस्था भी है। कि अगर स्वास्थ्य साथ न दे तो परिवार के लोग पालन करे। लेकिन मूलतः होता इससे अलग है, हम मैं और मेरा, और तू और तेरा तक ही रह जाते है।
सनक, सनातन सनंदन और सनत्कुमार चारो मुनि सनकादिक के नाम से श्रद्धा से देखे जाते थे उनकी जिज्ञासा पर की मनुष्य, सांसारिक ऐश्वर्य और भोग विलास मानव की अशांति व पतन के कारण है यह जानते हुए भी भोगों में क्यो लिप्त रहता है कि जिज्ञासा पैदा हुई।

ईश्वर की कृपा से ब्रह्मा जी ने उन्हें बताया कि शरीर क्षणभंगुर है इसे महत्व न देकर ईश्वर चिंन्तन का आश्रय लिए रहना चाहिए।

यही शोभित चिंन्तन समस्यायों से निजात दिला सकता है। वजह मनुष्य का जन्म लेकर समस्याएं साथ न हो मुश्किल है। लेकिन उनसे निजात मिलती रहे, वक्त कटता रहे इसके लिए अपने आराध्य का चिंन्तन भी जरूरी है।

एक शेर से शोभित पोस्ट बिराम

मुखालफत से मेरी शख्सियत संवरती है,
दुश्मनों का मैं बहुत एहतराम करता हूं। श्

शोभित टण्डन, सीतापुर

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