अयोध्या। अति प्राचीन सिद्धपीठ श्यामा सदन मंदिर के पूर्वाचार्य रहे स्वामी महंत संत गोपालदास महराज को उनके परम् शिष्य महंत श्रीधरदास महाराज ने नमन करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर याद किया।
उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान विश्व में सर्वोत्तम है। हम सबको गुरु के बताए हुए पदमार्गो पर ही चलना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वामी सन्त गोपालदासजी साधुता निर्मला वैराग्य की मिशाल रहे। वे परमार्थी गौ सन्त विद्यार्थियों की सेवा में गहन रुचि रखते थे। वे भगवान की नित्य आराधना करते थे।
उनके सानिध्य में हम सबको बहुत कुछ सीखने को मिला। उनकी कृपा हम व सब शिष्यों पर है। उनका व्यक्तित्व व कृतत्व अद्भुत रहा है। उनके जैसा गुरु मिलना अब दुर्लभ है। इस दौरान मन्दिर में आये कई प्रान्तों जनपदों के शिष्यों ने भी गुरु महाराज को नमन व याद करते हुए उनके चित्र पट पर पुष्प अर्पित कर नमन किये। इस दौरान भक्तो शिष्यो का भंडारा भी हुवा।
रिपोर्ट- वासुदेव यादव
