ग़ज़ब की सोच है हमारी देश का एक बड़ा तबक़ा रोटी कपड़ा मकान की जद्दोजहद में मरा जा रहा है देश में हर साल लाखों लोग भूख से मर जा रहे हैं किसानो को उनके ही ख़ून पसीने की कमाई को सरकार सालों साल देती नही है किसान क़र्ज़ से डूबा हुआ है अपने क़र्ज़ को अदा न कर पाने की वजह से राह न मिलने पर फाँसी लगाने से लेकर ज़हर खाने तक ख़बरें सुर्ख़ियो में रहती हैं जब जब चुनाव नज़दीक होता है सत्ता के कलाकार ग़रीबों के घर निवाले तो अंदर कर लेते है पर साहियोग के नाम पर मीठा आश्वासन मात्र मिलता है देश को खोखला करने वाले राज नेता अपनी मित्रता को निभाने में किसानो ग़रीबों के हिस्से का धन अमीरों क़र्ज़ माफ़ी में या फिर अपने नज़दीकियों को व्यक्तिगत लाभ पहुँचाने में ख़र्च कर दे हैं और देश के चंद दीमक हिंदू ख़तरे में है और मुसलमान देश द्रोही है साबित करने में लगा है अरे शर्म करो बेशर्मो ये देश अमन चैन पसन्द देश है यहाँ धर्म के सहारे अधर्मी अपनी नैया पार करने की जुगत में लगे हैं जहाँ शिक्षित लोगों को समाज को समझाना होगा जागरूकता लानी होगी!
