आनन्द कुमार मेहरोत्रा
3 जून को बिसवां चीनी मिल बंद हुई थी और अभी तक इस शुगर फैक्ट्री ने 20 मई तक का ही गन्ने का पैसा भेजा है शेष 13 दिनों का पैसा यह कब और कितनी किस्तों में भेजेगी यह फैक्ट्री के रहमों करम पर निर्भर है। केन यूनियन जो किसानों का प्रतिनिधित्व करती है वह इस समय शुगर फैक्ट्री की प्रवक्ता बन चुकी है उसका किसानों की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है। केन यूनियन के वर्तमान चेयरमैन राजकिशोर यादव जो कभी पूर्व विधायक रामपाल यादव के खास लोगों में शुमार किए जाते थे इस समय शुगर फैक्ट्री के सबसे बड़े पैरोकार बन चुके हैं उनसे जब कभी पेमेंट के बारे में पूछो तो वह कहते हैं कि बिसवां शुगर फैक्ट्री तो बहुत ईमानदार है अन्य फैक्टरियों ने तो अभी तक दिसंबर और मार्च तक का पेमेंट भी नहीं किया है। श्री यादव के अनुसार जैसे-जैसे शकर बिकती जाएगी वैसे-वैसे पेमेंट होता जाएगा। कुल पेमेंट कब तक होगा इस सवाल पर वह शुगर फैक्ट्री की ईमानदारी पर निबंध सुनाना शुरू कर देते हैं।
इस समय किसान धान की रोपाई कर रहा है उसमें पानी, खाद, बीज, कीटनाशक की आवश्यकता पड़ती है साथ में मजदूरी भी देनी पड़ती है इसके अलावा त्यौहार आने वाले हैं रक्षाबंधन और बकरीद भी आने वाली है उसके लिए भी अच्छे पैसों की आवश्यकता होती है आखिर गन्ना किसान इन सब जरूरी आवश्यकताओं के लिए पैसा कहां से लाए?
शुगर फैक्ट्री की यह लेट- लतीफी तब चल रही है जब प्रदेश से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है और सांसद, विधायक दोनों भाजपा के हैं और मंचों पर यह लोग किसान हितैषी होने का दंभ भी भरते हैं लेकिन इस मुद्दे पर यह सब चुप हैं। यह चुप्पी अकारण नहीं है समय-समय पर शुगर फैक्ट्री सबको पद और हैसियत के अनुसार इनाम इकराम से मालामाल करती रहती है। शासन से लेकर प्रशासन तक सभी लोग किसानों के नाम पर चुप रहने की कीमत पाते रहते हैं। शासन,प्रशासन और मिल मालिकों का यह गठजोड़ किसानों की आत्महत्या और गरीबी का सबसे बड़ा कारण है।
