दो अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने सादगी से रचाई शादी

👉 फिजूल खर्ची से दूर रहने का नई पीढ़ी को संदेश

👉 सादगी से शादी के बंधन में बधे इस नए जोड़े की लोग दे रहे मिसाल

संतोष यादव

कामनवेल्थ में स्वर्ण पदक विजेता रही अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी पूनम यादव एंव अंतर्राष्ट्रीय एथलीट धर्मराज यादव ने जिंदगी के नए सफर की शुरुआत की है। रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार एवं उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च सम्मान यश भारती से सम्मानित बनारस जनपद की मूल निवासी पूनम यादव की शादी मिर्जापुर जिले के नगर विधानसभा कौन ब्लाक निवासी बलदेव यादव के पुत्र अंतर्राष्ट्रीय एथलीट व आर्मी में नायब सूबेदार धर्मराज यादव के साथ अभी हाल ही में सादगीपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुई। नेम फेम वाली अंतर्राष्ट्रीय पहचान की वहू मिलने से मिर्जापुर वासियों में भी खुशी की लहर है। खासकर महिला खिलाड़ियों में नया उमंग है ।
विश्व में देश का नाम रोशन करने वाली शख्सियत की शादी रंगीनियत से दूर रही। और शादी की यह सादगी चर्चा का विषय बन गई। सादगी से शादी के बंधन में बधे इस नए जोड़े की लोग मिसालें दे रहे।
अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग खिलाड़ी, कॉमनवेल्थ गेम में स्वर्ण पदक विजेता रही एवं उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च सम्मान यश भारती से सम्मानित पूनम यादव का विवाह सादगीपूर्ण ढंग से आर्मी में नायब सूबेदार एवं अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स धर्मराज सिंह यादव संग सम्पन्न हुआ। अनावश्यक ताम झाम एवं फिजूल खर्ची से बचते हुए नव दाम्पत्य जोड़े ने खुद शादी को रंगीनियत से दूर रखी। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के इस फैसले से वाराणसी एवं मिर्जापुर दोनो जिलों के युवाओं एवं युवतियों के लिए यह नया जोड़ा मिसाल बनकर उभरा है। गौरतलब है कि पूनम यादव वाराणसी की रहने वाली है जबकि धर्मराज सिंह मिर्जापुर जिले के निवासी है।


पूनम यादव को मिर्जापुर की वहू के रूप में पाकर
मिर्जापुरवासी आह्लादित है। दूल्हे धर्मराज यादव के भाई व समाजवादी पार्टी के अनुसांगिक संगठन समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव कहते है कि जनपद वासियों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण एवं गर्व का विषय है कि मिर्जापुर जनपद में कॉमनवेल्थ गेम में गोल्ड मेडलिस्ट रही पूनम यादव मिर्जापुर जनपद की वहू होने जा रही है। बकौल चंदन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गोल्ड मेडलिस्ट पूनम यादव के मिर्जापुर जनपद में विवाह होने से महिला खिलाड़ियों की उम्मीदों को पंख मिलेगा मिर्जापुर जनपद के खिलाड़ियों खासकर महिला एथलेटिक्स में उत्साह की लहर है। खुशी के इस मौके पर दूल्हे धर्मराज यादव के पिता बलदेव यादव,बड़े पिता मुन्नू लाल यादव, मामा डॉक्टर राम प्रसाद यादव,भाई चंदन यादव, धर्मेंद्र यादव,अजय यादव सहित नाते रिश्तेदारों में भी पूनम यादव को वहू के रूप में पाकर जहाँ खुश है। वही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाली बेटी पूनम यादव को बहू के रूप में पाकर मिर्जापुर वासी भी गदगद है।

कॉमनवेल्थ गेम 2018 में पूनम यादव ने स्वर्ण पदक जीतकर बढाया देश का मान

कॉमनवेल्थ गेम 2018 में पूनम यादव ने 69 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया था। पूनम यादव ने इससे पहले 2015 में इस टूर्नामेंट- 2014, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: 63 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज, 2014, अलमाटी (कजाखिस्तान) वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में 20वें नंबर पर रहीं थीं। 2015 में पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड, 2017 में कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप (गोल्ड कोस्ट): 69 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर, 2017- अनॉहाइम (अमेरिका) में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 69 किग्रा कैटेगरी में 9वें नंबर पर रहीं थीं। तब उन्होंने 218 किग्रा (स्नैच में 98 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 120 किग्रा) का वजन उठाया था।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के दादूपुर गांव में पली बढ़ी पूनम ने मुफलिसी से खूब संघर्ष किया लेकिन कभी हार नही मानी। हमेशा खुद के बनाए रास्ते पर चलने की जिद रही उनकी यही जिद उन्हें इस मुकाम तक लाई। आज पूनम यादव शोहरत की बुलंदियों पर है। अपने दम पर अपनी पहचान बनाकर आज वह गांवों ,कस्बों में संघर्षरत बेटियों के लिए नजीर बनकर उभरी है।

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