एक बार फिर मशहूर हुआ बरेली का बाज़ार

1966 में आई एक फिल्म “मेरा साया” के एक गाने “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में” से मशहूर हुआ बरेली शहर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लेकिन इस बार बरेली का बाजार एक आजाद ख्याल और निरंकुश लड़की के मनमाने फैसले से चर्चा में है। इस लड़की ने न सिर्फ अपने घर से भागकर शादी की बल्कि अपने पिता और भाई पर मनमाने आरोप लगाकर उसको सोशल मीडिया पर वायरल भी किया। इस समय यह लड़की अपने पिता की बेइज्जती का सबब बनी हुई है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ खास चैनलों ने एक मजबूर पिता और बेबस भाई की पत्रकारिता के नाम पर खूब खिल्ली भी उड़ाई।

यह वही लड़की है जिसको बड़े अरमानों से, नाज़ों से एक पिता ने पाला, मां ने संवारा और भाई ने पुचकारा। यह वही लड़की है जिसको 22 साल तक एक पिता ने न सिर्फ अपना साया दिया बल्कि उसके हर एक अरमान को, हर ज़िद को पूरा किया। लेकिन आज यह लड़की बालिग हो चुकी है। आज इसको न सिर्फ खुद फैसला लेने का कानूनी अधिकार ही प्राप्त है बल्कि अपने पिता के ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगाकर उनको समाज के सामने बेइज्ज़त करने के तरीके भी पता है। 1966 में जिस बरेली के बाजार में अभिनेत्री “साधना” का झुमका गिरा था उसी बाजार में एक मजबूर पिता की आबरू नीलाम हो रही है और वह भी उसकी अपनी लड़की की वज़ह से। भले ही उच्च न्यायालय ने लड़की की शादी को वैध माना हो और उसको पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की हिदायत दी हो लेकिन शादी के बाद लड़की ने जिस तरह से अपने घर वालों पर आरोप लगाकर उनको सरेआम बदनाम किया उसके लिए यह समाज उस लड़की को शायद कभी क्षमा नहीं करेगा। कभी कभी सामाजिक कायदे, कानूनी धाराओं से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

लेखक – आनन्द मेहरोत्रा (पेशे से अधिवक्ता है ये लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है ) 

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