महाराजा गुह्यराज निषाद जयंती पर निषाद पार्टी की विशाल रैली

लखनऊ। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल “निषाद पार्टी” के तत्वाधान में पूर्वांचल की धरती एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृहजनपद गोरखपुर में महाराजा गुह्यराज निषाद जयंती, निषाद पार्टी गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय अधिवेशन एवं मछुआ एससी आरक्षण के मुद्दे को लेकर एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। डॉ. निषाद जी आज अपने आवास पादरी बाजार से कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम स्थल के लिए प्रस्थान किए।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने कहा कि आज से 10 वर्ष पूर्व निषाद पार्टी का गठन किया गया था। उससे पहले राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद, जो कि निषाद पार्टी का मूल संगठन है, उसके अंतर्गत मझवार (केवट, बिंद, मल्लाह, कहार, निषाद, साहनी)/तुरैहा (कश्यप, बाथम, धीवर, रायकवार), तरमाली पासी (भर-राजभर) की उपजातियों को परिभाषित करने के उद्देश्य से कार्य प्रारंभ हुआ था। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी अपने एक दशक के कार्यकाल के बाद भी अपने मूल मुद्दों पर अडिग है।

उन्होंने कहा कि मछुआ आरक्षण को लेकर निषाद पार्टी लगातार केंद्र व राज्य सरकार के साथ वार्ता कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के पास सत्ता में आने के बाद पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा छोड़े गए कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित थे। प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री मछुआ आरक्षण के विषय पर सदैव गंभीर रहे हैं। डॉ. निषाद जी ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी एवं समाजवादी पार्टी—पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने मछुआ आरक्षण के मुद्दे को अत्यधिक जटिल बना दिया, जिसके कारण आज इसके समाधान में समय लग रहा है।

उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी प्रदेश में चार बड़ी जनसभाओं के माध्यम से अपनी मांगों को प्रदेश एवं केंद्र सरकार के समक्ष रखने का कार्य करेगी। यह कोई विरोध नहीं, बल्कि निषाद समाज का संकल्प है, जिसने एनडीए और बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने आगे कहा कि मछुआ समाज की सभी उपजातियों की एक ही मांग है कि केंद्र व राज्य सरकार उत्तराखंड की तर्ज पर यह स्वीकार करे कि शिल्पकार एक जाति नहीं बल्कि जातियों का समूह है। उसी आधार पर उत्तर प्रदेश में मझवार/तुरैहा/तरमाली पासी भी एकल जाति नहीं बल्कि जातियों का समूह है। डॉ. निषाद ने कहा कि आज विपक्ष के लोग प्रश्न करते हैं कि मत्स्य मंत्री बनने के बाद क्या किया गया। इसका उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग के माध्यम से मछुआ समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 70 हजार से अधिक मछुआरों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया है। इनमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री मछुआ दुर्घटना बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (मत्स्य पालन क्षेत्र हेतु), मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषाद राज बोट योजना, माता सुकेता केज कल्चर, मत्स्य पालक कल्याण कोष (शिक्षा, चिकित्सा, विवाह, दैवीय आपदा सहायता), मत्स्य उत्सव केंद्र सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में मछुआ समाज के विकास के लिए बनाए गए विभाग को क्यों निष्क्रिय रखा गया। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र में 70 वर्षों तक शासन करने के बावजूद केवल 3 हजार करोड़ रुपये ही मछुआरों के लिए दिए गए, जबकि प्रधानमंत्री की मछुआ विकास नीति एवं निषाद पार्टी के सहयोग से केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में 67 हजार करोड़ रुपये देकर मछुआ समाज के कल्याण के लिए ठोस कार्य किया है। उत्तर प्रदेश में मत्स्य विभाग को पहले केवल नात-रिश्तेदारों को खुशकरने के लिए मत्स्य विभाग में मौजूद जलाशयों को दोहन करने के लिए दिया जाता था।निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपनी प्रमुख मांगों को बिंदुवार रखते हुए विस्तार से प्रस्तुत किया है, ताकि समाज के अधिकारों और समस्याओं को मजबूती से सामने लाया जा सके।केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, बाथम और कश्यप जैसी जातियों को पूर्व से अंकित मझवार और तुरैहा श्रेणी के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) में शामिल किया जाए। पार्टी का तर्क है कि ये सभी समुदाय सामाजिक, आर्थिक और पारंपरिक रूप से एक ही वर्ग से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें समान संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।मछुआ समाज को पहले नदी, बालू खनन और पुश्तैनी घाटों पर आसामी दर्ज के साथ अधिकार प्राप्त थे। किन्तु पूर्व की सरकारों द्वारा इन पारंपरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया, जिससे समाज की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। पार्टी इन अधिकारों की पुनः बहाली की मांग कर रही है।

उत्तर प्रदेश में वर्ग-3 की भूमि मछुआ समाज के लिए आरक्षित थी और उन्हें आसामी दर्ज प्राप्त था, क्योंकि समाज का 80% से अधिक हिस्सा भूमिहीन है। इसके बावजूद पूर्व सरकारों ने यह अधिकार समाप्त कर दिया। निषाद पार्टी की मांग है कि इस भूमि को पुनः समाज के लिए आरक्षित किया जाए, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके।भारत सरकार के आदेशानुसार मछुआ समाज की कई उपजातियों को, क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के पीड़ित होने के कारण, विमुक्त जाति एवं जनजाति के अधिकार प्राप्त थे। किन्तु वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा इन लाभों को समाप्त कर दिया गया। पार्टी की मांग है कि इन अधिकारों को पुनः लागू किया जाए, जिससे समाज को न्याय मिल सकें।

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