सीतापुर: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के क्रम में गुरुवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आशीष जैन ने जिला कारागार सीतापुर का मासिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जेल की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानी गईं।


निरीक्षण के समय सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विजय भान तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौरव प्रकाश भी मौजूद रहे। वहीं जिला कारागार में जेल अधीक्षक प्रीति यादव, जेलर राजेश कुमार वर्मा सहित अन्य जेल अधिकारी भी उपस्थित रहे।जनपद न्यायाधीश ने महिला बैरक, किशोर बैरक सहित अन्य बैरकों का निरीक्षण कर बंदियों से सीधे बातचीत की। इस दौरान किसी भी बंदी ने निःशुल्क विधिक सहायता के लिए कोई प्रार्थना या अन्य शिकायत नहीं की। निरीक्षण के दौरान जेल अस्पताल और पाकशाला की भी जांच की गई, जहां सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं।
निरीक्षण के दौरान ऐसे विचाराधीन बंदियों से भी बातचीत की गई जो अपनी संभावित सजा की आधी अवधि से अधिक जेल में बिता चुके हैं। इस संबंध में अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए कि धारा 436A सीआरपीसी के तहत लाभ पाने के योग्य विचाराधीन बंदियों की सूची प्रत्येक सप्ताह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजना सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा जेल लीगल एड क्लीनिक का भी निरीक्षण किया गया। वहां मौजूद पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) से उनके कार्यों और निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं के बारे में जानकारी ली गई तथा रजिस्टरों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान बंदियों को विभिन्न न्यायिक मामलों और शासन द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस दौरान चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल बृजेन्द्र कुमार अवस्थी, डिप्टी चीफ सुजीत बाजपेई, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल शुभांशी तिवारी, अंकुर वर्मा और भूपेंद्र कुमार दीक्षित भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान जातीय भेदभाव से जुड़ा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया और जेल की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं।
