सीतापुर के नैमिषारण्य में स्थित मां ललिता देवी मंदिर के कपाट सूतक काल के चलते सुबह 6:20 बजे बंद कर दिए गए थे। दोपहर 3:20 बजे से शुरू चंद्र ग्रहण जो सांयकाल 6:45 तक रहा। 6:45 के बाद उग्रव होने के बाद खोले गये कपाट। मां ललिता देवी मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है और यहां पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है ।
चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। ग्रहण समाप्ति के पश्चात मंदिर परिसर में गंगाजल से शुद्धिकरण, मंत्रोच्चार एवं विशेष पूजन संपन्न कराया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई।
जैसे ही कपाट खुले, मां के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने मां ललिता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हो सकी।
मां ललिता देवी मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है। यही कारण है कि विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
चंद्र ग्रहण के बाद मंदिर में पुनः आरंभ हुए दर्शन ने भक्तों में उत्साह और आस्था का नया संचार कर दिया है।
