लखनऊ। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 95वीं शहादत दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में स्थित इन महान क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर छात्रों ने न केवल उनके जीवन और संघर्ष को याद किया, बल्कि उनके क्रांतिकारी विचारों को आज के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान क्रांतिकारी कवि पाश को भी याद किया गया, जिनकी कविताएँ आज भी अन्याय और दमन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं। छात्रों ने पाश की प्रसिद्ध पंक्तियों को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि क्रांतिकारी चेतना केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता है।
इस अवसर पर आइसा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष समर ने कहा, “भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हमें यह सिखाती है कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष को केवल भावनात्मक स्मरण तक सीमित नहीं किया जा सकता। आज जब शिक्षा संस्थानों से लेकर समाज के हर क्षेत्र में असमानता और दमन के नए रूप सामने आ रहे हैं, तब उनके विचारों को संगठित प्रतिरोध में बदलना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
“उन्होंने आगे कहा, “पाश की चेतावनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है—सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना। इसलिए यह समय खामोश रहने का नहीं, बल्कि सवाल उठाने और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करने का है।
“आइसा ने इस मौके पर यह भी रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और आलोचनात्मक सोच को विकसित करने के केंद्र होने चाहिए। ऐसे में, भगत सिंह की वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाना आज के छात्र आंदोलन की केंद्रीय जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शहादत की इस विरासत को केवल प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे समानता, न्याय और स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय रूप से रूपांतरित किया जाएगा।
