लखनऊ। इस पृथ्वी पर मनुष्य,पशु-पक्षी व पेड़-पौधों के जीवन व अस्तित्व के लिए तमाम महत्वपूर्ण जरूरतों में से जल सर्वाधिक महत्वपूर्ण व जरूरी चीज है। जल के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वैश्विक जल संकट से जूझ रही पूरी दुनिया को जल के महत्व को समझाने, स्वच्छ जल उपलब्ध कराने, पानी की बर्बादी को रोकने,जल को प्रदूषित होने से बचाने और स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष दुनिया भर में 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।1993 में पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया।
विश्व जल दिवस प्रतिवर्ष एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है।विश्व जल दिवस 2026 की आधिकारिक थीम (विषय) “जल और लैंगिक समानता” है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वर्ष का अभियान इस बात पर केंद्रित है कि जल संकट का प्रभाव महिलाओं और पुरुषों पर समान नहीं होता। इस थीम के माध्यम से दुनिया का ध्यान उन चुनौतियों की ओर आकर्षित करना है, जिनका सामना महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित जल और स्वच्छता की कमी के कारण करती हैं।इस वर्ष का मुख्य नारा यानि स्लोगन है, “जहाँ जल बहता है, वहाँ समानता बढ़ती है।
दुनिया के कई हिस्सों में जल संग्रह की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं और लड़कियों की होती है, जिससे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों पर बुरा असर पड़ता है। जल प्रबंधन और नीति-निर्माण में महिलाओं के नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। पानी जैसे बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन पर यदि हम मिलकर सहयोग करते हैं तो पानी दुनिया भर में शांति का एक उपकरण बन सकता है। जल को लेकर भारत की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
दुनिया की लगभग 17 फ़ीसदी आबादी वाले देश भारतवर्ष के पास दुनिया के जल का मात्र चार फ़ीसदी हिस्सा ही है।भारतवर्ष में शहरों के साथ-साथ अब गांवों में भी जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारतवर्ष के कई शहर गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं।रिपोर्ट यह बताती है कि भारत वर्ष में जहां 2020 तक 10 करोड़ से भी अधिक लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ वर्ष 2030 तक लगभग 40 फ़ीसदी लोगों के लिए जल उपलब्ध नहीं होगा,जो कि एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक बात है। जल प्रदूषण के कारण जल गुणवत्ता के मामले में भी भारत की स्थिति बहुत ही दयनीय,निराश करने वाली और चिंताजनक है।
विश्व जल गुणवत्ता सूचकांक में भारतवर्ष 122 देशों की सूची में 120वें स्थान पर है। इसको हम इस प्रकार भी कह और समझ सकते हैं कि दुनिया में 122 देशों में से 119 देश भारतवर्ष से अच्छा और शुद्ध जल पी रहे हैं। ये सभी आंकड़े भारतवर्ष में जल की भयावह स्थिति को बताने के लिए पर्याप्त हैं।जल की बदहाल स्थिति बताती है कि जल प्रबंधन को लेकर अगर भारत वर्ष सावधान और गंभीर नहीं हुआ तो आने वाले भविष्य में इसके गंभीर व भयावह परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जल की गंभीर समस्या को देखते हुए भारत की सरकार को चाहिए की इस समस्या के समाधान के लिए एक वृहद रूपरेखा और कार्य योजना बनाए,जिससे भविष्य में देश को जल संकट से ना जूझना पड़े,क्योंकि जल है तो जीवन है और रहीम ने अपने दोहे के माध्यम से बहुत पहले ही कह दिया था कि-“रहिमन पानी राखिए,बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे मोती,मानुष,चून।
