लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को सूचित किया है कि पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश में एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (Dedicated OBC Commission) का गठन किया जाएगा। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण तय किया जाएगा।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब वर्ष 2027 तक टल सकते हैं, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय न्यायालय की कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही थी। दरअसल, हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि पंचायत चुनाव से पहले एक समर्पित आयोग का गठन किया जाएगा, जो वैज्ञानिक आधार पर पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगा। उसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन
सरकार ने अदालत को बताया कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उठाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने से पहले “ट्रिपल टेस्ट” की अनिवार्यता बताई है, जिसमें समर्पित आयोग का गठन प्रमुख शर्त है।
चुनाव प्रक्रिया पर क्या असर?
राज्य सरकार के इस निर्णय से पंचायत चुनाव की समय-सीमा आगे बढ़ सकती है। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपेगा और उसके आधार पर आरक्षण तय नहीं होगा, तब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना कम है।
वहीं दूसरी ओर, राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के विभिन्न स्तरों—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत—के प्रत्याशियों के लिए अधिकतम चुनाव खर्च सीमा भी तय कर दी है।
क्या है आगे की स्थिति?
समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जल्द
आयोग द्वारा विस्तृत सर्वे और रिपोर्ट तैयार
रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का निर्धारण
उसके बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
#UPPanchayatElection #UPGovernment #OBCReservation #HighCourtLucknow #SupremeCourt #PanchayatElection2027 #BreakingNews #LucknowNews
