लखनऊ: जिस उत्तरप्रदेश परिवहन निगम को अधिकारी- कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर करोड़ो का राजस्व सरकारी ख़जाने में भेजते है। उन्हें बैठने के लिए जुगाड़ की कुर्सियों का सहारा लेना पड़ता है । चारबाग़ बस अड्डे पर ऐसी ही कई कुर्सियां आसानी से देखने को मिल जाएंगी। जो जुगाड़ के सहारे चल रही है। यह तो सिर्फ एक बानगी है । जरा सोचिए उत्तरप्रदेश के अन्य परिवहन निगम के बस अड्डो का क्या हाल होगा। क्या कुर्सियां लाने के लिए भी परिवहन विभाग को टेंडर निकालना पड़ेगा । रिपोर्ट: मोहित लोधी
