मानो तो देव नही तो पत्थर…, मंचों पर इन्हीं पात्रों का महिमामंडन करने वालों ने उड़ाया मखौल।
संतोष यादव
सुलतानपुर। जिस अयोध्या में राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान की भेषभूषा में विमान से उतरने वाले पात्रों की सूबे के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी खुद अगवानी करते हैं उसी अयोध्या से सटे सुल्तानपुर जिले में शासन सत्ता से जुड़े लोगों की कुर्सी के पीछे भगवान की भूमिका निर्वहन कर रहे पात्रों को विवश होकर खड़ा होना पड़ा।
यह नजारा दूबेपुर ब्लॉक पर आयोजित कलश यात्रा विदाई समारोह का है। जहां नेताओं एवं अफसरों के लिए कुर्सियां लगाई गई एवं भगवान की भूमिका निर्वहन कर रहे पात्रों को कुर्सियों के पीछे खड़ा कर दिया गया। दंभ में चूर नौकरशाह एवं सत्ताधारी नेताओं के सामने यहां तो भगवान भी बौने साबित हुए। राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान एवं भगवान शिव के प्रतीक बने पात्रों का मखौल उड़ाया गया। भगवान को किसी ने देखा तो है नही। जो जिस रूप में सोचता, देखता है उसे उसी रूप में नजर आता है। अर्से से तस्वीरों, मूर्तियों के रूप में प्रतीक मानकर लोग पूजते आ रहे हैं।
इधर जिले में दुर्गा पूजा महोत्सव जोर पर है। अपनी एक नही कई विशेषताओं के चलते इस ऐतिहासिक एवं अनूठे दुर्गा पूजा महोत्सव दौरान स्याह करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। तस्वीर राम, लक्ष्मण, भरत, सीता के साथ ही शिव की भूमिका निर्वहन कर रहे पात्रों की उपेक्षा से जुड़ी है। दुर्गा पूजा, रामलीला में मंचों पर इन्हीं पात्रों को महिमामंडन करने वाले सियासतदानों एवं नौकरशाहों ने यहां तो एक कार्यक्रम दौरान हद ही कर दी। जिस भेषभूषा में आम लोग इन्हें भगवान का प्रतीक मानकर पूजते हैं उसी भेषभूषा में इन सभी पात्रों को नेताओं एवं अधिकारियों की कुर्सी के पीछे काफी देर तक खड़ा रहना पड़ा। कुर्सियों पर जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना, एसपी सोमेन वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष आरए वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष उषा सिंह, ब्लाक प्रमुख शिल्पा सिंह, शिव कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी अजय पांडेय, परियोजना निदेशक केके पाण्डेय समेत कई बिराजमान रहे। यह कृत्य कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। खबर फोटो वायरल हुई तो अब कोई भी कुछ बोलने को तैयार नही है। सुनने में आ रहा कि यह सब कृत्य मातहतों द्वारा नेताओं एवं अधिकारियों को खुश करने के लिए व्यवस्था बनाई थी लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। जब यह बात समझ में आई तो मातहतों को फटकार भी मिली।
