शिकायतों और दुआओं में जब एक ही शख्स हो, समझ लो इश्क इबादत के मुकाम पर है।
शोभित चिंन्तन यहीं है। संसार का कर्ता धर्ता एक।
फिर हम उसे भूले इधर उधर भटकते रहते है। न रास्ता मिलता है न मंजिल
जीवन मे इसी दौड़ भाग में दुख की अनुभूति छुपी होती है। अनुभूति ही दुख का कारण है। जिनके अनुभूति की बीमारी नही होती वह मस्त होते है, उन्हें ज्यादा मगज मारी नही करनी पड़ती।
वजह वह अन्य के विषय मे नही सोचते । फिर जो अनुभूति का झुनझुना लिए घूम रहे हैं, वही दुखी होते है।
अठहरवे अध्याय में गीता में श्री कृष्ण कहते है समाधि वही स्थिति है जिसमे हम इच्छाओं पर नियंत्रण कर सके। अनुभूति ही इच्छा की एक ब्रांच है।
नजीर बनारसी साहब की दो लाइनों से शोभित पोस्ट बिराम।
जिंदगी है एक टूटा सिलसिला जोड़ सकते है तो आकर जोड़िए,
मेरा दिल मन्दिर मसिज्द नही, कम से कम इसे समझकर तोड़िये।
शोभित टण्डन, सीतापुर
