आज संसार के खुशी दिखने के पीछे का दर्द लोग देख नही पा रहे, न जाने कितने परिवार रिस्ते घमंड के घाव के नीचे जीने को विवश है।
शोभित चिंन्तन से देखे पहले कम पढ़े लिखे लोगो मे यह शायद कम होगा। आज सुरक्षित भविष्य की सोचते सोचते खुद को लोग असुरक्षित करने की दिशा में तैर रहे है। एक ऐसी भंवर की तरफ परिवार जा रहे है जहाँ डूबना ही डूबना है निकलने का कोई रास्ता ही नही। दूसरे घरों में भी बड़े अपना बड़प्पन खो चुके उनकी भी कोई वकत नही। जो उनकी कोई सुने। बड्डपन उम्र से नहि सोच और सिद्धांतों से पैदा होता है। एक लक्ष्मण रेखा से होता है। कि इसके अंदर प्रवेश बर्जित किसी का भी ।
कौन समझाए किसे समझाए।
आले में रखे रखे भगवान को भी खुद की तरह भाव हीन समझते है। तभी वह भी कोई रास्ता नही दिखाते। दिखाए भी क्यो जब हम उनकी बात को व्यवहार को समझे तो, जीवन की मिठास को जारी रखने के लिए दो लाइने जरूरी है।
बहुत दिन हो गये है तुमसे बिछड़े,
अब मिलने को मन कर रहा है।
यह भाव शोभित चिंन्तन और शोभित दर्शन को जाग्रत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन मुश्किल है क्रोध अविवेक को उतपन्न कर देता है। शोभित चिंन्तन जाग्रत कैसे हो।
दो लाइनों से पोस्ट बिराम..
क्या कहा मुझसे दूर जाना है,
मतलब कि तुम दूर जा चुके हो।
शोभित टण्डन
शोभित टण्डन आश्रम शोभित सीतापुर ।
