आज शोभित चिंन्तन का आधार डैडी पिक्चर के गाने की लाइने।
व्यापारियों के विश्वास पर अंसमझे और अनजाने वारो को रेखांकित करती है। आज एक अजीब वाकया हुआ। जी एस टी के आन लाइन नए लोगो के सर्वे में पुराने व्यापारी भी आ गए। जो व्यापारी 40 वर्ष से कार्य कर रहे है। वाणिज्य कर या अन्य कर जमा करते रहे है, रजिस्टर्ड व्यापारी है।
सरकार या विभाग को उनका सम्मान करना चाहिए। लेकिन सरकार ने कानून किसी और मतलब से निकाला कि नए या जो रजिस्टर्ड व्यापारी नही है। उन्हें आन लाइन आवेदन के जरिये एक हफ्ते में रजिस्टर्ड की प्रतिक्रिया पूरी कर दी जाए। हुआ यह कि रजिस्टर्ड व्यापारियों की भी विभाग लिस्ट निकाल कर फिर सर्वे।
आधार कार्ड और पेन कार्ड की फ़ोटो कापी। क्या जब व्यापारियों ने 40 साल पहले कार्य शुरू किया तब यह क्या लागू थे, नही।
समय समय पर विभाग नवीनीकरण करता रहता है।
कल 20 जुलाई 2021 को भी कानपुर में सम्पन्न अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की बैठक में तमाम बातों पर दिक्कतों का जिक्र हुआ। बैंकों ने भी हिटरल शाही आर बी आई कि गाइडलाइन के नाम पर मचा रखी है। तीस तीस साल पुराने खातों को ब्लाक करने का,संस्थाओं के खाते ब्लाक करने का। हर बार नई के वाई सी के नाम पर उत्पीड़न। क्या रोज पहचान बदल जाती है। फिर खाता ब्लाक भी करे तो पैसे की चेक बना कर खाताधारक को दे आपका खाता बन्द। क्या ब्लाक खाते की धनराशि उनके बाप की है, इस पर कोई ध्यान नही जबाब नही।
अफसोस इस बात का है। सबके प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी मन की बात करते है, जनता के मन की बात समझते और सुनते नही। आज मुख्यमंत्री योगी जी ने आदेश किया है कि व्यापारियों की समस्याएं नगर स्तर पर निपटाई जाए।
अफसोस यह है कि अधिकारी बेलगाम है, व्यापारियों की कोई बात सुनना नही चाहते। सरकार मौजूदा स्थिति से बनती बदलती रहती है। अगर लोगो का भरम टूट जाता है।किसी भी पार्टी की सरकार को भूतकाल गवाह है, सरकार बदल जाती है। कितना आक्रोश आज व्याप्त है। डीजल पेट्रोल और गैस के दामो में बढ़ोत्तरी और उस पर ध्यान न देना सरकार की जिद है।
जनता की जिद के आगे समय पर सारा राबा ढाबा फेल हो जाता है। कमाल है आज पुनः पेन कार्ड और आधार कार्ड हमे अपने को साबित करने के लिए देना पड़ता है। ऑफिसों के कम्प्यूटर का खाली डब्बे है,या निरंकुश अफसरशाही।
चार लाइनों से शोभित पोस्ट बिराम।
डरता हूँ रुक न जाये कविता की बहती धारा, मैली है जब से गंगा, मैला मन हमारा, किस आइने में देखे मुँह अपना चांद तारे, गंगा का सारा जल हो जब गंदगी का मारा।
शोभित टण्डन
शोभित टण्डन आश्रम, सीतापुर
