इस रात आसमान से बरसती है अल्लाह की रहमतें

शब-ए-बारात पर रियासत अली सिददीकी विशेष रिपोर्ट

रामकोट/सीतापुर। रहमतो की है ये रात, नमाजो का रखना साथ, मनवा लेना रब से हर बात, दुआवो मे रखना याद, मुबारक हो आप को शब-ए-बारात ! माह शाबान की पन्द्रहवी शब (रात ) के सिलसिले में गौर व फिकर करने की जरूरत है। कि उस रात में इन्सानों को क्या अमल करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए। इस उम्मत पर अल्लाह तबारक तआला ने अपने महबूब रसूल ऐ पाक सल्लाहू अलैहिवसल्लम कि बरकत से बहुत एहसानात फरमाये। उनमें से शाबान की पन्द्रहवीं शब (रात) भी उम्मते मोहम्मदिया के लिए रहमत ऐ मगफिरत और बखशिस का सीजन (जरिया) बना कर भेजा है। इब्ने माजा कि रिवायत है कि रसूल ऐ पाक सल. ने फरमाया शाबान की पन्द्रहवीं शब (रात) जब मयस्सर (नसीब) हो जाये तो उसमे कयाम करो, और उस दिन का रोजह रखो। अल्लाह रब्बुलइज्जत पन्द्रहवीं रात के गुरूबे अफताब (मगरिब) के बाद आसमानी दुनिया की तरफ तमाम रहमतो को मुतव्वजे फरमा कर आवाज देता है कोई है माफी चाहने वाला कि उसको माफ करूं, है कोई रोजी चाहने वाला कि मै उसको रोजी दू, है कोई मुसीबत जदा जो मुझसे मुसीबत दूर करने के लिए कहे और मै उसकी मुसीबत दूर कर दू, इसी तरीके से अल्लाह तआला कि तरफ से मुसलसल सुबह सादिक (सूरज निकलने) तक इसी तरह ऐलान होता रहता है। बैहकी कि रिवायत है कि रसूल ऐ पाक सल. कि उम्मुल मुमिनीन हज़रत आयसा सिददीका रजियल्लाहू अनहा से रिवायत है कि रसूल ऐ पाक सल. ने रात को खड़े होकर नमाज पढनी शुरू कर दी। जिसमें इतना लम्बा सजदा किया कि मैने शब खयाल किया कि आप रसूल ऐ पाक सल. का विशाल (इंतकाल) हो गया। जब मैने यह देखा तो खड़ी होकर हाजिरे खिदमत हुई और आप रसूल ऐ पाक सल. के पैर ऐ मुबारक के अंगूठे को हिलाया वह हिल गया तो मै समझ गयी कि आप रसूल ऐ पाक सल. ठीक है। फिर कान लगाकर मैने सुना तो रसूल ऐ पाक सल. सजदे मे यह दुआ पढ़ रहे थे कि ऐ अल्लाह मै पनाह मांगता हूं तेरी माफी के साथ तेरे आजाब से, और मै पनाह मांगता हूं तेरी खुशनुदी के जरिये तेरे गुस्से से, और मै ऐ अल्लाह पनाह मांगता हूं तेरे आजाब से, और ऐ अल्लाह मै पनाह मांगता हूं तेरी माफी के जरिये तेरे आजाब से, और ऐ अल्लाह तू इतनी खूबियों वाला है कि मै उनको गिन नही सकता, और इतनी तारीफे है तेरी कि तू खुद ही उनको जानता है, ऐ अल्लाह तू ऐसा ही है जैसा कि तूने खुद अपनी तारीफ की है, जब आप रसूल ऐ पाक सल. ने सजदे से सर उठाया और नमाज से फारिग हुये। तो मुझ से फरमाया कि ऐ आयशा सिददीका रजियल्लाहू अनहा क्या तुमने ये ख्याल किया कि अल्लाह के रसूल ऐ पाक सल. तेरी हक तलफी करने मे अर्ज किया। कि रसूल ऐ पाक सल. खुदा तआला कि कसम ऐसा नही है मैने आप रसूल ऐ पाक सल. के सजदे के लम्बे होने कि वजह से ख्याल किया था कि शायद आप रसूल ऐ पाक सल. का विशाल (इंतकाल) हो गया। फिर आप रसूल ऐ पाक सल. ने फरमाया कि ऐ आयशा रजियल्लाहू तआला अनहा क्या तुम जानती हो कि ये कौन सी रात है। मैने अर्ज किया अल्लाह और उसके रसूल ज्यादा जानते है। तो आप रसूल ऐ पाक सल. ने फरमाया कि आज शाबान की पन्द्रहवीं शब (रात) है। इस शब (रात) में अल्लाह तबारक तआला आपने बंदो की तरफ नजरें रहमत से देखता है, और माफी चाहने वालो को माफ करता है, और रहम चाहने वालो पर रहम करता है, और बुग्ज (दुश्मनी) रखने वालो को उनके हाल पर छोड़ देता है। इस हदीस से साबित हुआ कि इमामुल अम्बिया ने ये काम उम्मत के हक में कर के दिखलाया कि मेरी उमम्त भी इन कामो की तरफ रागिब हो। रसूल ऐ पाक सल. की जुबाने मुबारक से अन्दाजाह कर लिया होगा कि ये रात बखशिश की है, और ये रात गुनाहो से नजात दिलाने की है, लेकिन बअज बद नसीब और अजली बद बखत ऐसे भी है जिनको उस रात भी बखशिश और रहमत से नही नवाजा जाता है। चनानचे हजरत आयशा सिददीका रजियल्लाहू अनहा इरशाद फरमाती है कि हुजूर नवी करीम रसूल ऐ पाक सल. के पास हजरत जिबरील अलयहिसलाम तशरीफ लाये और फरमाया शाबान की पन्द्रहवीं शब (रात) है। उस रात मे अल्लाह तबारक तआला बनू कल्ब की बकरियों वालो के शुमार के बराबर दोजख से बन्दों को आजाद करता है। और अल्लाह तबारक तआला उस रात को मुशारिक (सिर्क करने वाले) की तरफ नजरें  रहमत से नही देखता है, और टखने के नीचे पायजामा लटकाने वालो की तरफ नही देखता है, और न ही कीना पखर की तरफ देखता है, और न ही रिश्ता तोड़ने वालो की तरफ देखता है, और न ही मां बाप के न फरमान की तरफ देखता है, और न ही शराब पीने वाले की तरफ देखता है, इसलिए जरूरी है कि हर रोज अपने गिरेबान मे मुंह डालकर अपना मुहासिबार (जायजा) करें कहीं उन बीमारियों का हम शिकार तो नही हो चुके। अगर आप मरीज है तो आइये जल्दी से तौबा कीजिये और खुदा तआला की रहमते लूटने के लिए एक नई जिन्दगी की। सरकारे दो आलम रसूल ऐ पाक सल. का शाबान में रोजा रखने का मामूल था। चुनानचे उम्मे सलमा रजियल्लाहू तआला अनहा की रिवायत है कि मैने हुजूर रसूल ऐ पाक सल. को मुताबिर दो महीने रोजा रखते नही देखा सिर्फ शाबान और रमजान के। इस हदीस से मालूम होता है कि सरकार दो आलम रसूल ऐ पाक सल. शाबान मे कसरत से रोजा रखते थे। हजरत असमा इब्ने जैद रजियल्लाहू तआला अनहू फरमाते है कि मैने अर्ज किया या रसूल ऐ पाक सल. मैने आप को रमजान के अलावा इतने रोजे रखते नही देखा। जिस कदर आप रसूल ऐ पाक सल. शाबान के महीने मे रोजा रखते तो आप लोग रजब और रमजान के दरमियान वाले महीने की फजीलत से गाफिल है। मेरी ख्वाहिश है कि मेरे आमाल अल्लाह तआला के सामने रोजा की हालत मे बने हो। आमाल की पेशी एक बहुत ही नाजुक मरहल (रास्ता) है इसलिए पेशी के वक्त रोजादार होने से बारगाहे खुदा बंदी से जरूर बंदे के आमाल को हस्ने सनद अता फरमाई जाएगी और बारगाहे ऐ जदी मे जरूर आमाल को शरफे कबूलियत अतः फरमाया जायेगा। हुजूर रसूल ऐ पाक सल. के आमाल और फरमाने मुबारक है जो लोग आमाले आतिशबाजी या दीगर रसूलमात चीजों को अपनाते है वह फरमान रसूल ऐ पाक सल. के चलने वाले नही है और वह मुखलिफे नबी है इस्लाम के गद्दार मुनाफिको के पीछे चलने वाले है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे बेकाईद्दगी से परहेज करें और बचें और अल्लाह तआला के सामने तौबा व मगफिरत खूब करें। जो लोग शब ऐ बारात की रात तीन मरतबा सूरह यासीन पढ़ेगा अल्लाह तबारक तआला उसकी उम्र में बरकत, रिज्क मे इजाफा करेगा और फारखी और नगाहनी आफत से महफूज रखेगा।

उसे जहन्नुम की आग न छूऐगी

एक हदीस पाक मे हुजूर ऐ पाक सल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स शाबान की पन्द्रह तारीख को रोजा रखेगा उसे जहन्नुम की आग न छूऐगी।

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