बेटियां जल रही हैं उनको दिखता नही हम पराली जलाएं गुनहगार है
अब किसान पर मनाई का नाही जानवर का राज है
तरक्की बहुत की है गांव से शहर में आकर वहां हम हल चलाते चलाते चलाते थे यहां रिक्शा चलाते हैं
तिरंगे से जो भी मोहब्बत करेगा ये लड़की उसी से मोहब्बत करेगी
रामकोट/सीतापुर। केपी मेमोरियल पब्लिक स्कूल की तरफ से श्री रामेश्वरम धाम प्राचीन मंदिर गंगासागर तीर्थ परिसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रुप में कारागार अधीक्षक डीसी मिश्रा व विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा नेता व समाजसेवी ललित श्रीवास्तव (चंचल) रहे।

सम्मेलन में लखीमपुर-खीरी से नवल सुधाँशु, बाराबंकी से रामकिशोर तिवारी व अनिल बौझड़, बस्ती से डॉ. शिवा त्रिपाठी (सरस), हरदोई से श्याम त्रिवेदी (पंकज), नैमिषारण्य से जगजीवन मिश्रा, रालामऊ-सीतापुर से केदारनाथ शुक्ल, सीतापुर से कीर्तिकेय शुक्ला, जालेपारा से अमरेंद्र सिंह चौहान आदि कवियों की वीर रस पर आधारित देश भक्ति की रचनाओं पर सभी दर्शक भाव विभोर हो गए। कवियों ने हास्य-व्यंग्य व राजनीति से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत की। देश के जाने माने ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपने काव्य पाठों से उपस्तिथ जन समूह को भाव विभोर कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन रामकिशोर तिवारी ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके हुआ। श्री रामेश्वरम धाम प्राचीन मंदिर गंगासागर तीर्थ परिसर कवियों की रचनाओं से देश भक्ति के रंगों में रंग गया। इससे पहले विद्यालय प्रबंधक डॉ आरके यादव ने सभी अतिथियों व कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

कवि सम्मेलन में कवि श्रृंखला में कवि नवल सुधांशु ने “दिलों में आंखों के अंदर रहूंगा नदी के लिए मैं समंदर रहूंगा तुम्हारी नजर में कुछ ना रहूं पर मैं मां की नजर में सिकंदर रहूंगा, न पहले कभी वो शिकायत करेगी पलट कर न वो फिर शरारत करेगी तिरंगे से जो भी मोहब्बत करेगा ये लड़की उसी से मोहब्बत करेगी” ने खूब बाहवाही बटोरी।
कवि जगजीवन मिश्र ने “जाने कैसे हुए मेरे सरकार है कुछ तो वादे हुए बासी अखबार हैं बेटियां जल रही हैं उनको दिखता नही हम पराली जलाएं गुनहगार है” के बोलों से श्रोताओं के मन को झकझोर दिया।

अगली कड़ी में कवि केदारनाथ शुक्ल ने अपनी कविता ” अब इन अस्तित्व हीन नेताओं की बोलो क्या बात लिखूं गंदी नाली के कीड़ों की बोलो कितनी औकात लिखूं, यह मौसम के मिजाज को देखकर रंग बदलता है आजकल के नेताओं पर बहुत ज्यादा चलता है”
इसी श्रृंखला में कवियत्री डॉ. शिवा त्रिपाठी (सरस) ने अपने काव्य पाठ मे ” देह में जब तक रूधिर का एक कण बाकी रहेगा भारती की वंदना का स्वर सदा गूंजा करेगा करेगा”।
श्रोताओं में देर से प्रतीक्षित कवि अनिल बौझड़ ने ” गौमाता गोबर कई डारिन बोवा गवा जो गल्ला गौमाता के लल्ला उमा आवे दिए ना कल्ला कल्ला दिए ना कल्ला अब तो लागत है किसान से बहुत दूर अनाज है अब किसान पर मनाई का नाही जानवर का राज है, जीतने रूपयम किहिन नौकरी पर बाबा सचिवालय मा, उतने रूपयम घुसि ना पैहौ आज कोई शौचालय मा” अपने हास्य और चुटीले व्यंगों से जनमानस को आनंदित कर दिया जिसने सुनाकर पाँडाल के वातावरण को खुशनुमा बनाया।
कवि रामकिशोर तिवारी ने “तरक्की बहुत की है गांव से शहर में आकर वहां हम हल चलाते चलाते चलाते थे यहां रिक्शा चलाते हैं, कायरता जिस चेहरे का श्रृंगार करती है मक्खी भी उस पर बैठने से इंकार करती है है करती है है करती है करती है ”

कवि अमरेंद्र सिंह चौहान ने “जरूरत पड़ी तो हम वतन पर पर जान भी देंगे मिलो अपना समझ कर तुम्हें तुम्हें कर तुम्हें तुम्हें सम्मान भी देंगे पुराने छोड़ दो किस्से नई पहचान भी देंगे, जिसे पूजता था उसी का छला हूं तुम्हारे गमों को मिटाने चला हूं गरल कंठ में हैं अधर पर है अमृत जख्म दिल छुपाकर पर है अमृत जख्म दिल छुपाकर हंसाने चला हूं” इस दौरान कवि सम्मेलन को सुनने के लिए गणमान्य व्यक्ति सहित भारी भीड़ मौजूद रही।
रिपोर्ट-रियासत अली सिद्दीकी
