मकान मालिक पर भारी रायबरेली पुलिस, किया थर्ड डिग्री टॉर्चर

मकान मालिक पर भारी रायबरेली पुलिस, किया थर्ड डिग्री टॉर्चर

अपनी ही सरकार में पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठे भाजपाई

मामूली मामले में रायबरेली पुलिस ने किया थर्ड डिग्री टॉर्चर

सावधान! अगर आप किसी अनजान व्यक्ति को मकान किराए पर देने जा रहे हैं, तो यह खबर पढ़ लीजिए। रायबरेली पुलिस की मदद से अनजान व्यक्ति कहीं आपका मकान न हड़प ले और आपको थर्ड डिग्री का टॉर्चर भी होना पड़ें। जी हां, रायबरेली में इस समय पुलिस की मदद से मकानों को हड़पने का धंधा बहुत ही तेजी से फल-फूल रहा है। ऐसा ही वाकया आचार्य द्विवेदी नगर के निवासी धर्मेंद्र मौर्या के साथ भी हुआ। जिन्होंने एक अनजान व्यक्ति को मकान किराए पर दिया और वहीं व्यक्ति उनके मकान पर नजर बना बैठा।

यही नहीं, रायबरेली पुलिस ने ही किरायेदार के इशारे पर मकान मालिक को थर्ड डिग्री टॉर्चर किया। बैनामा कराने के लिए किरायेदार के इशारे पर पुलिस बुधवार को धर्मेंद्र और उसके पिता को उठा ले गई और जबरदस्ती बैनामा लिखाने के लिए टॉर्चर करने लगी। इस मामले की जानकारी जब भाजपा कार्यकर्ताओं को हुई, तो भाजपा नेता अनीता श्रीवास्तव, विजय रस्तोगी, गया प्रसाद शुक्ला के नेृतत्व में कोतवाली पहुंच गए और हंगामा करने लगे। हंगामा बढ़ता देख स्वॉट प्रभारी अमरीश त्रिपाठी ने हाजिर किया और कोतवाली पुलिस के हवाले कर किया।

कानून व्यवस्था अपर पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्र में धर्मेंद्र मौर्य की पत्नी बिन्दु मौर्य ने बताया कि उनके मकान में रह रहा किरायेदार जयकरन सिंह जबरदस्ती मकान का बैनामा लिखना चाहता है। उसने मेरे पति के खिलाफ झूठा मुकदमा 24 अगस्त को लिखा दिया कि मेरे पति ने उनसे 33 लाख 50 रुपये लि है। अभी तक साक्ष्य तक न प्रस्तुत कर पाए जयकरन सिंह ने पुलिस को मोटी रकम दे दी और अब वह लोग मेरे पति धर्मेंद्र मौर्य और ससुर अमरनाथ को टॉर्चर कर रहे हैं। बिन्दु ने बताया कि बुधवार की सुबह मामले के विवेचक अरुण अवस्थी मेरे पति को आचार्य द्विवेदी नगर उठा लिया और ससुर अमरनाथ को पीट-पीटकर बैनामा लेकर चले गए और दिनभर धर्मेंद्र मौर्य को टॉर्चर करते रहे और जमकर पिटाई भी की। रात्रि में हंगामा होता देख पुलिस कोतवाली लेकर आई।

अपनी सरकार में धरने पर बैठे भाजपाई

अपनी ही सरकार में भाजपाई धरने पर बैठने को मजबूर है। रायबरेली पुलिस उनकी सुन ही नहीं रही है। कुछ ऐसा ही वाकया बुधवार की शाम को भी हुआ, जब परिजनों के साथ में भाजपा नेत्री अनीता श्रीवास्तव और विजय रस्तोगी पहुंचें और लगातार धर्मेंद्र मौर्य के बारे में पूछते रहे, लेकिन कोतवाली पुलिस कुछ बता ही नहीं सकीं। यही नहीं, कोतवाली में बैठे ही बैठे करीब दो घंटे बीत गए इसके बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं बताया, तो धरने पर बैठ गए। हंगामा बढ़ता देख स्वॉट प्रभारी अमरीश त्रिपाठी धर्मेंद्र मौर्य को लेकर कोतवाली आए। पुलिस की संदिग्धता पर भाजपाई डीएम शुभ्रा सक्सेना के पास पहुंचें गए। डीएम ने इस मामले की जांच के लिए सीओ सिटी सहित प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्ति कर दिया है।

किरायेदार के इशारे पर पुलिस कर रही काम

आचार्य द्विवेदी नगर निवासी धर्मेंद्र मौर्य के साथ जिस तरह से रायबरेली पुलिस पिछले चार महीने से काम कर रही है, वह बस किरायेदार जयकरन सिंह के इशारे पर कर रही है। अपनी खाऊ-कमाऊ नीति के विख्यात रायबरेली की कोतवाली पुलिस को जयकरन सिंह ने मोटी रकम दे दी है। यही नहीं, इस मामले में जिले से स्थानांतरित हो चुके एक बड़े अधिकारी भी भूमिका संदिग्ध रही। पीड़ित परिवार कई बार उनसे मिला, लेकिन उन्हें न्याय नहीं दिया गया। पुलिस ने पीड़ित परिवार के खिलाफ उल्टा मुकदमा लिख दिया।

मामूली से मामले में छेड़छाड़ तक का मुकदमा

पैसा लेकर कैसे करके मासूमों को फंसाया जाता है, अगर यह सिखना है तो रायबरेली पुलिस के कारनामें से सीखिए। रायबरेली पुलिस किस तरह से मासूम लोगों को फंसा रही है, इसका ताजा वाकया धर्मेंद्र मौर्य के मामले में देखने को मिला। अपने मकान को खाली कराने के लिए पिछले कई महीनों से अधिकारियों की चौखट पर फरियाद लगाइ, लेकिन पुलिस छेड़छाड़, जबरदस्ती घर में घुसने से लेकर कूटरचित, जान से मारने की धमकी से लेकर 11 धाराओं में मुकदमा लिख दिया है। पुलिस ने जिस तरह से इस मामले में कार्रवाई की है, उससे उस पर ही सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस ने पत्रकारों से की बदसूलुकी

रायबरेली पुलिस बुधवार की रात को अपना असली चेहरा उजागर होता देख पत्रकारों पर ही झल्ला उठी। जनता के सामने असली बात न आने पाए इसके लिए पुलिस हंगामे को कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ ही बदसूलुकी करने लगी। परिजनों के हंगामा करने की जानकारी जब पत्रकारों को हुई, तो पत्रकार कवरेज करने के लिए कोतवाली पहुंच गए और थर्ड डिग्री का शिकार पीड़ित धर्मेंद्र मौर्या के परिजनों से बयान लेने लगे। इसी दौरान अपने असली चेहरे की रिकॉर्डिंग होता देख स्वॉट प्रभारी अमरीश त्रिपाठी झल्ला उठे और पत्रकारों से ही बदतमीजी करने लगे। पत्रकारों को हंगामे को रिकॉर्डिंग न होने की नसीहत देने लगे। यहीं नहीं, हंगामा बढ़ता देख स्वॉट प्रभारी कोतवाली से चले गए।

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