• 10 दिसंबर तक चलेगा फाइलेरिया अभियान
• उत्तर प्रदेश के 19 जनपदों में चलेगा अभियान
सीतापुर: फाइलेरिया अभियान का यह चरण 25 नवंबर से शुरू हो रहा है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की लगभग चार हजार टीमें घर-घर जाकर जनपदवासियों को फाइलेरिया की दवा खिलाएँगी। यह कहना है एसीएमओ डॉ सुरेन्द्र सिंह का। डॉ सुरेन्द्र बुधवार को फाइलेरिया अभियान के तहत मीडिया कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटेरनेशनल (पीसीआई) के सहयोग से आयोजित मीडिया कार्यशाला में एसीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया अभियान के इस चरण में इस बार लंबाई और उम्र के आधार पर दवा खिलाई जाएगी। गत वर्ष हमारे देश के विभिन्न प्रदेशों के 5 जनपदों में ट्रिपल ड्रग थेरेपी कार्यक्रम चलाया गया था जिसमें उत्तर प्रदेश में यह दवा सिर्फ वाराणसी जनपद में फरवरी 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत खिलाई गई थी। इसके बहुत सार्थक परिणाम मिले हैं।
उन्होने बताया कि वर्ष 2018 में 43,29,601 जनसंख्या लक्षित थी जिसमें 39,34,332 लोगों यानि लक्ष्य के मुक़ाबले 90.87 प्रतिशत को फाइलेरिया की दवा दी गई। इसी तरह वर्ष 2017 में 43,26,939 जनसंख्या लक्षित थी जिसमें 38,91,135 लोगों यानि लक्ष्य के मुक़ाबले 89 प्रतिशत को फाइलेरिया की दवा की मुहैया कराई गई। इसी तरह इस वर्ष के इस अभियान में लगभग 52 लाख की जनसंख्या को आच्छादित करने का लक्ष्य रहा गया है।
इस मौके पर ज़िला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी राज कुमार , मलेरिया अधिकारी अनिल मिश्रा, जिला एपिडेमोलाजिस्ट डॉ विवेक सचान और पीसीआई और सीफार टीम मौजूद रही।
वनिला फ्लेवर में होगी दवा
डॉ सिंह के अनुसार ट्रिपल ड्रग वाले में जिलों में एल्बेण्डाजोल, डीईसी और आईवरमेक्टिन खिलाई जाएगी। फाइलेरिया अभियान के दौरान दी जाने वाले एल्बेण्डाजोल टैबलेट का फ्लेवर वनिला होगा। जबकि डबल ड्रग वाले जिलों में एल्बेण्डाजोल, और डीईसी खिलाई जाएगी। एल्बेण्डाजोल टैबलेट चबाकर खाना है जबकि डीईसी और आईवरमेक्टिन को पानी से खाना है। माइक्रोफाइलेरिया से ग्रसित मरीज में दवा खाने के बाद उल्टी, खुजली और जलन की समस्या आम बात है। समान्यतः यह समस्या दो प्रतिशत मरीजों में आती है। उन्होने बताया कि यह दवा दो साल उम्र से ऊपर के लोगों को ही देनी है। जबकि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नहीं खिलानी है।
जननागों में सूजन (हाइड्रोसील) न करें नजरंदाज
फाइलेरिया ग्रस्त मरीज को बुखार आना, शरीर में खुजली होना, हाथी पांव होना, अंडकोश मे सूजन आना आदि कुछ समान्य लक्षण होते हैं। अधिकांश मरीजों में इसका संक्रमण बचपन से ही आता है। लेकिन कई वर्षों तक इसके लक्षण पता नहीं चल पाते हैं। डॉ सिंह ने बताया कि फाइलेरिया ग्रसित मरीज को डबल ड्रग के जरिये ठीक होने में 5 से 6 वर्ष लग जाते हैं। जबकि ट्रिपल ड्रग के जरिये दो से तीन वर्ष में ही मरीज स्वस्थ हो जाता है।
बचाव
• मच्छरों से बचाने के लिए विशेष ध्यान दें
• आस-पास साफ पानी भी इकट्ठा न होने दें
• पानी न हटा पाएं तो उसमें केरोसीन डाल दें
• चोट या घाव वाले स्थान को हमेशा साफ रखें
• पूरी बाजू का कपड़ा पहने और साफ-सफाई रखें
• सोते वक्त हाथ व पैरों में सरसों या नीम का तेल लगा लें।
