जनसुनवाई पोर्टल पर महज कागजी निस्तारण से दौरे में उमड़ रही भीड़
कलेक्ट्रेट की मीटिंग के बाद सैकड़ों फरियादियों ने सौंपा एमपी को शिकायती पत्र
योगेश यादव , सुलतानपुर
(सुल्तानपुर): जन सुनवाई के लिए सरकारी पोर्टल और पटल की संख्या बढ़ने के बावजूद फरियादियों का भरोसा नहीं जग रहा है । इसका जीता-जागता प्रमाण जिले की सांसद मेनका संजय गांधी के दौरे में दिखा ।व्यस्त शेड्यूल होने के बावजूद दूरदराज के फरियादी उनके (श्रीमती गांधी) कार्यक्रम स्थल में पहुंचकर अपना शिकायती पत्र दे रहे हैं। दौरे के दूसरे दिन सुबह नवोदित सांसद श्रीमती गांधी कलेक्ट्रेट में मीटिंग के समय चंद पल के लिए रुकीं तो पुलिस का घेरा होने के बावजूद पीड़ितों ने अपनी एप्लीकेशन हाथों हाथ आगे बढ़ा दिया। भीड़ से घिरी मेनका गांधी एक ओर पत्रकारों से मुखातिब थीं तो दूसरी ओर का मंजर सिस्टम पर सवाल उठा रहा था।
समस्याओं से भरा पत्र उनकी ओर एक दूसरे के हाथ से होते हुए आगे बढ़ने लगे । सारे शिकायती पत्र सांसद प्रतिनिधि रणजीत सिंह व उनके बगल मौजूद जिम्मेदारों के हाथों की ओर पहुँचने लगे । कलेक्ट्रेट का यह दृश्य बल्दीराय के जनता दर्शन की ओर ध्यान दिलाता है ।जब जन समस्याओं पर गंभीर नहीं होने पर डी•एम•सी इंदुमती तहसील के लापरवाह कर्मियों पर भड़क गईं थी। जिसकी वजह भी वाजिब थी क्योंकि समस्या का समाधान किसी एक अधिकारी के बूते की बात नहीं है ।चाहे वह संपूर्ण समाधान दिवस हो ,थाना दिवस ,जनसुनवाई पोर्टल,सुबह 9-12 जनता दर्शन ,मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 19 12 ,वूमेन हेल्पलाइन 181, 1090 वगैरा – वगैरह।हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि सांसद मेनका गांधी तक पहुंचे ज्यादातर फरियादी अन्य पटल से निराश लौटे थे, जो चिंता का विषय है। इससे साफ है कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी शिकायतों के निस्तारण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं । संभवतः इस बात का एहसास श्रीमती गांधी को भी हो चला है क्योंकि उनके अनुभव ने ही उन्हें यहां के भ्रष्ट लेखपाल ,कोटेदार और प्रधानों पर टिप्पणी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस बार के दौरे में उन्होंने बताया कि *वह प्रतिदिन स्वयं 50 फोन जिले के लोगों के लिए करती हैं* यह आंकड़ा पूर्व सांसद वरुण गांधी को कहीं पीछे छोड़ता है ।फिलहाल कड़वा सच यही है कि जनता की समस्याओं का जवाब देने के लिए हर सरकारी कर्मी फ़ाइल पूरी करने में व्यस्त है और वहीं फरियादी अपनी समस्या का निस्तारण सही से नही होने पर मायूस है।
