यूं ही नही करतार हुए केशव’, ‘यूपी रत्न’ सम्मान से मुख्यमंत्री ने नवाजा

संतोष यादव, सुलतानपुर

‘कागज में छपते है दुनिया के किस्से हकीकत की दुनिया में चाहत नही, उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के प्रख्यात समाजसेवी करतार केशव यादव के लिए ये लाइने सटीक बैठ रही है। जवानी से शुरू उनकी जनसेवा का कार्य बुढ़ापे के इस पड़ाव पर भी जारी है। अपने कामों को लेकर उनमें कभी अख़बारों में छपने की चाहत नही दिखी। लेकिन उनके कृत्य ऐसे रहे कि कोई ऐसा अखबार नही जिसमें वह छपे न हो। दूरदर्शन एवं टाइम्स ऑफ इंडिया ने उन्हें स्पेशल कवरेज किया। 70 साल की उम्र में भी वही जोश,वही जज्बा,वही जुनून जो जवानी के दिनों में था। बचपन से ही जनसेवा का भाव लिए करतार केशव की सेवा निःस्वार्थ रही है। जनसेवा का जो पौध उनके द्वारा अर्से पूर्व रोपित किया गया था वह आज विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। उनकी प्रेरणा से कई संस्थाए उनके कार्यो को गति दे रही है।
कहते है कि,’मिसाल दी जाती है, बोली नहीं जाती’ करतार केशव ने यही मिसाल आने वाली पीढ़ियों को दी है। खुद कुछ कहा नही बल्कि करके दिखाया है। आज शायद इसी का नतीजा है कि उनसे प्रेरणा लेकर दर्जनों स्वयं सेवी संगठनों से जुड़े सैकड़ों युवा भी सेवा के मार्ग पर चल पड़े हैं। पहले साइकिल अब बिना गियर की मोटरसाइकिल ने सेवा के उनके सफर को आसान बनाया है। सुबह घर से उनके निकलने का वक्त तय होता है, लेकिन घर वापस कब आएंगे यह तय नहीं होता। यह एक दिन की बात नहीं होती यह सिलसिला 50 सालों से चला आ रहा है। उनकी सेवा की लोग मिसाल देते है।
अस्पताल में जब अपने सगे संबंधी जीवन मौत से जूझ रहे लोगों को खून देने से कतराए तब करतार आगे आए। लोगो को भरोसा है कि जब तक करतार जिंदा है किसी को खून की कमी से मरने नहीं देंगे। यह भरोसा हर किसी को है। यह भरोसा ही उनकी पूंजी है।
इसी भरोसे ने करतार को ऐसी ताकत दी कि खुद 40 बार रक्तदान किया और सैकड़ो रक्तदाताओं की एक फौज भी तैयार की है।

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