संतोष यादव
सुलतानपुर। पति सीमा पर देश के दुश्मनों से लड़कर शहीद हो गए मुझे और मेरी बच्चियों को उन पर गर्व है। लेकिन आज अपने देश के नेता से हक के लिए मुझे लड़ना पड़ रहा है, इस पर शर्म आ रही है। यह अल्फाज 20 साल पहले कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए मान सिंह यादव की विधवा विद्यावती के है।

गौरतलब है कि कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए मान सिंह यादव की पत्नी विद्यावती अपनी तीन बेटियों संग उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के शास्त्री नगर मुहल्ले में रहती है।
लगभग 25 साल पहले सैनिक मान सिंह यादव ने ही
शहर के पाश इलाको में शुमार शास्त्री नगर मुहल्ले में मकान बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। उनका मकसद था कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद यही शिफ्ट हो जाएंगे लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था। वर्ष 1999 में हुई पाकिस्तान से कारगिल की लड़ाई में वे बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हो गए। उनकी वह हसरत अधूरी रह गई। पति की शहादत बाद गमों के पहाड़ तले दबी पत्नी विद्यावती अपनी तीन मासूम बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने को लेकर गांव से शहर आ गई। पति के द्वारा खरीदी गई जमीन पर मकान बनवाकर बेटियों संग रहने लगी। कुछ दिन बाद एक नेता जी से रास्ते को लेकर विवाद हो गया। सुलह समझौते भी हुए लेकिन बात नही बनी।समझौते में जो तय हुआ वह भी अब मानने को तैयार नही है। घर के आगे की सड़क नही बनने दी जा रही है। जिससे विद्यावती अपनी कार को घर तक नही ले जा सकती है।मजबूरन अपनी कार को उन्हें 5 किलोमीटर दूर अपने पम्प पर खड़ी करनी पड़ती है।अपनी लड़ाई को लेकर दुखी कारगिल शहीद की विधवा अधिकारियों के चक्कर लगाते लगाते जब थक गई तो दीवानी न्यायालय की शरण में गई। अब मामले का निपटारा कब होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है,लेकिन अजीब विडम्बना है जिस देश के लिए मान सिंह ने अपनी जान कुर्बान कर दी उसी देश के नेताजी से उनकी विधवा को अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा है।
