एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर जो मीडिया की सुर्खी नहीं बनी…!

बच्चों के साथ 6 माह में 24 हजार रेप की घटनाएं दर्ज हुई।

मीडिया में लगातार आ रही बच्चों से रेप की घटनाओं से आहत होकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वता संज्ञान लिया और उसे जनहित याचिका में बदल दिया।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता ने देश में बच्चों के साथ लगातार बढ़ रही रेप की घटनाओं से चिंतित होकर पीआईएल रजिस्टर की और रजिस्ट्री से पूरे देश में 1 जनवरी से अब तक ऐसे मामलों में दर्ज एफ आई आर और की गई कानूनी कार्यवाही के आंकड़े तैयार करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से आंकड़े मंगाए। 1 जनवरी 2019 से 30 जून 2019 तक के जो रेप के आंकड़े आए वे न सिर्फ देश और समाज को शर्मिन्दा करने वाले हैं बल्कि झझकोरने वाले भी हैं। पूरे देश में 6 माह में 24212 मामले दर्ज किए गए। यानी प्रति माह बच्चों के साथ 4 हजार रेप की घटनाएं होती हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान न लिया होता तो शायद यह बात जनता के सामने न आती क्योंकि सरकारें सिर्फ वही आंकड़े जनता के सामने पेश करती हैं जिससे सरकार की वाहवाही हो सके।

हतप्रभ कर देने वाली इस काली सूची में 3457 मुकदमों के साथ उत्तर प्रदेश सबसे आगे और 2389 मामलों के साथ मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर है जबकि 9 मुकदमों के साथ नागालैंड सबसे नीचे है।

इन आंकड़ो से सुप्रीम कोर्ट की चिंता और बढ़ गई और उच्चतम न्यायालय ने रजिस्ट्री से जिलावार बच्चों से रेप के मामले और कुल लंबित मामलों की डिटेल मांगी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील वी गिरी को न्याय मित्र नियुक्त किया है और अगली तिथि 25 जुलाई लगाई है।

लेखक – आनन्द मेहरोत्रा ( लेखक पेशे से एडवोकेट है ) 

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