चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से देश का नाम भारत वर्ष पड़ा

 

रुद्रमहायज्ञ के दौरान राजा दुष्यंत शकुंतला का मंचन

पिसावां (सीतापुर) इलाके के हसनापुर गावँ के समीप ब्रम्हदेव स्थान पर चल रहे पंचम श्री रुद्रमहायज्ञ के दौरान मथुरा वृन्दावन से आये लड्डू गोपाल लीला दर्शन मण्डल के कलाकारों राजा दुष्यंत व शकुंतला के पुत्र भरत का चरित्र चित्रण कर यह सदेश देने का प्रयास किया कि उन्हीं के नाम से अपने देश का नाम भारत वर्ष पड़ा।राजा दुष्यंत एक परित्यक्त ऋषि पुत्री शकुन्तला से प्रेम करने लगते है। दोनों जंगल में गंधर्व विवाह कर लेते हैं। राजा दुष्यंत अपनी राजधानी लौट आते हैं। इसी बीच ऋषि दुर्वासा शकुंतला को शाप दे देते हैं कि जिसके वियोग में उसने ऋषि का अपमान किया वही उसे भूल जाएगा। काफी क्षमाप्रार्थना के बाद ऋषि ने शाप को थोड़ा नरम करते हुए कहा कि राजा की अंगूठी उन्हें दिखाते ही सब कुछ याद आ जाएगा। लेकिन राजधानी जाते हुए रास्ते में वह अंगूठी खो जाती है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब शकुंतला को पता चला कि वह गर्भवती है। शकुंतला लाख गिड़गिड़ाई लेकिन राजा ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया। जब एक मछुआरे ने वह अंगूठी दिखायी तो राजा को सब कुछ याद आ गया। तब राजा दुष्यंत शकुंतला की तलाश करने लगते है तलाश करते समय वह एक जंगल मे पहुचने पर देखते हैं एक बालक शेर की पीठ पर सवारी कर रहा है राजा उसे गोद मे उठा लेते है।तब तक शकुंतला भी पहुच जाती है और बताती है कि यह आपका ही बेटा है जिसके बाद सभी हसी खुशी राजमहल वापस आ जाते हैं राजा दुष्यंत के पश्चात भरत ने बागडोर सम्हालते हुये दया करुणा शूरवीरता के संगम से एक चक्रवर्ती सम्राट के रूप में पहचान बनाया जिनके नाम पर ही अपने देश का नाम भारत वर्ष पड़ा।

रिपोर्ट- अरूण शर्मा

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