रामकोट क़स्बे में कुरान मुकम्मल, मुकम्मल कुरान के मौके पर अमन-ओ-अमान की मांगी दुआ
रियासत अली सिद्दीकी
रामकोट/सीतापुर। रमजान-उल-मुबारक के पाक महीने में रामकोट कस्बे की जामा मस्जिद में हाफिज मो. शुऐब, पुरानी बाजार में चांद बाबू के मकान में हाफिज असलम कुरैशी, पत्रकार रियाज सिद्दीकी के मकान में मौलाना मेराज नदवी के द्वारा सुनाएं जा रहे तरावीह मे कुरान पाक मुकम्मल हुआ। कस्बें में रमज़ान का चाँद देखने के बाद प्रतिदिन तरावीह में दो पारों को सुनाया गया।
कुरान पाक मुकम्मल होने के बाद हाफिज जलील अहमद ने कहा नबी करीम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा स.आ. व. की वाज़ेह हदीस है कि रमज़ान का चाँद देख कर मुसलमान तरावीह का एहतिमाम करें और ईद का चाँद देख कर तरावीह खत्म करें। तरावीह हर मुसलमान के लिए पढ़ना ज़रूरी है। ईद के चाँद से पहले कम दिनों में क़ुरआन मुकममल होता है तरावीह नहीं। उन्होंने आगे कहा कि ईद के चाँद से पहले तरावीह खत्म करना सख्त गुनाह है और लोगों को नबी की बतायी बात पर अमल करते हुए पूरे रमज़ान तरावीह पढ़ना चाहिए।
मो. लईक नदवी ने कहा जब एक बंदा इस मुकद्दस माह में अल्लाह के हुक्म पर रोजा रखता है, इबादत करता है, रात को तराबीह पढ़ता है तो अल्लाह की नेमत उस पर नाजिल होती हैं। अल्लाह अपने बंदों से इस महीने बहुत करीब होता है। रमजान दरअसल इबादत का महीना है इस माह के अंदर एक नेक काम करने का सवाब सत्तर नेक कामों के बराबर मिलता है। तरावीह मे कुरान पाक का सुनना सुनन्त है। पूरे माह सुनना यह अलग सुनन्त है। बताया कि हाफिज का मकाम बहुत ऊंचा होता है। और इस पर भी रोशनी डाली कि जो कलाम पाक हिफ्ज करने के बाद भूल जाता है उसका बहुत बुरा अंजाम होता है। लोगो को इस ताकीद कि अपने कुछ वक्त मे से कलामुल्लाह शरीफ को पढे इस का भी बहुत अजरो सवाब बताया। यह इतना पाक महीना है इस महीने अल्लाह तबारक तआला ने लौहे महफूज से आसमानी दुनिया पर आपनी किताब कुरान पाक नाजिल किया। यह इतना ताकतवर कलाम है अगर इसको पहाड़ पर उतारा जाता तो पहाड़ रेजा-रेजा हो जाता। अल्लाह ने अपने बन्दे पर रहम करते हुये जनाबे मोहम्मद सल्लाहू अलैहिवस्लम पर नाजिल किया। यह ऐक ऐसी किताब है जिसकी जिम्मेदारी खुद अल्लाह तबारक तआला ने उठाई हैं। इसका नजारा हम खुद हिन्दुस्तान के अन्दर लाखों हुफ्फाजे किराम को देख सकते है।
मौलाना मेराज नदवी ने कहा बदकिस्मत हैं वह लोग जिनको यह महीना मिले और अपनी मगफिरत न करा सकें। मुसलमानों के लिए लाजिम है कि रोजे रखें, जकात अता करें, गलत कामों से बचें, इन सब कामों को करते हुए जो इंसान जिंदगी गुजारेगा अल्लाह उसे दोनों जगह बदला देगा। तराबीह व बयान के बाद हाफिज जलील अहमद ने बारगाहे ईलाहीे मे कौम ओ मिल्लत के लिये दुआये खैर और अमन ओ अमान की दुआ की।
हाफिज निसार, हाफिज आकिब, हाफिज मो. समी, हाफिज अलीम कुरेशी सहित काफी लौग मौजूद थे।
