मुलायम सिंह ने फूलन देवी को सांसद बनाया तो शिवपाल सिंह यादव कमला देवी को लड़ा रहे लोकसभा चुनाव

“राजनीति में एक और फूलन”

सुलतानपुर की कमला देवी एवं बीहड़ की फूलन देवी ने अन्याय के खिलाफ जो आवाज बुलंद की उसकी गूंज सदियों तक सुनाई पड़ेगी। दबे,कुचले समाज से आने वाली पीढ़ियों की जुबां पर कमला देवी एवं फूलन देवी सरीखी महिलाओं के किस्से जरूर होंगे।
कमला ने जो कमाल कर दिखाया है वह कोई पुरुष भी नही कर पाया। जिस सामंतवाद के खिलाफ कमला ने निर्भीक होकर अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ाई लड़ी उस सामंतवाद के खिलाफ मजबूत राजनेताओं ने भी सामने से लड़ने की हिमाकत नही कर पाए ये सियासी चेहरे गुरिल्ला युद्ध ही खेलते रहे। गांव के बुजुर्ग
फूलन एवं कमला में काफी समानताएं देखते है। वे फर्क सिर्फ इतना देखते है कि समय काल परिस्थिति के अनुसार संघर्ष का तरीका बदल गया है। फूलन देवी के समय में स्थितियां कुछ और थी कमला देवी के समय में स्थितियां कुछ और है। फूलन ने हथियार उठाये कमला ने भी हथियार उठाया अंतर यही रहा कि फूलन ने कानून को हाथ में ले लिया लेकिन कमला देवी ने हथियार आत्म रक्षा के लिए उठाया है उन्हें न्याय पालिका एवं देश की जनता पर पूरा भरोसा है कि उन्हें एक दिन न्याय जरूर मिलेगा। दोनों ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और यह संयोग ही है कि इन दोनों विरंगनाओं को अपनी इस लड़ाई में सैफई परिवार का साथ मिला। फूलन देवी ने अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेकर संसद की दहलीज तक पहुँच गई थी वही कमला देवी न्याय की आस में अपनी फरियाद लेकर आज जनता की अदालत में है। कमला देवी की कहानी फूलन देवी से काफी कुछ मिलती है। फूलन को मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी से सांसद बनाया तो मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने कमला देवी को सांसद बनाने के लिए अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा रहे है। अपने साथ अन्याय के विरुद्ध उठ खड़ी हुई कमला देवी देश की सबसे बड़ी पंचायत के हो रहे चुनाव में उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले से शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार है।
फूलन की कहानी से तो सभी परिचित हैं लेकिन कमला देवी की कहानी से बहुत लोग अनभिज्ञ होंगे। कमला देवी उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की मझवारा गांव की निवासी है। यह गांव धनपतगंज ब्लाक का हिस्सा है। इसी ब्लाक में एक गांव मांयग है। जहां के निवासी चन्द्रभद्र सिंह सोनू,एवं यशभद्र सिंह मोनू है। सोनू विधायक रहे और मोनू ब्लाक प्रमुख रहे। दोनों भाई की दबंगई छबि है। उन पर कई हत्या मारपीट के मुकदमे भी है। मायंग मझवारा से एक दम सटा है। वर्ष 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कमला देवी के पति रामकुमार यादव की सोनू मोनू एवं उनके गुर्गो द्वारा लाठी, डंडो एवं तलवार से निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे की वजह यह थी कि रामकुमार अपनी पत्नी कमला यादव को मझवारा गांव से प्रधानी का चुनाव लड़ना चाहते थे। वही सोनू मोनू कमला के पति रामकुमार यादव को प्रधानी का चुनाव न लड़ने के लिए रोक रहे थे यहाँ से सोनू अपने स्कूल के एक बाबू रामसूरत की पत्नी को निर्विरोध प्रधान बनाना चाहते थे। लेकिन लोकतंत्र के हिमायती रामकुमार अपनी जिद पर अड़े रहे और प्रधानी का पर्चा खरीद लिया। यह बात सोनू मोनू को नागवार गुजरी। और चुनाव बाद कमला यादव के पति की पीट पीट कर हत्या कर दी गई।तबसे कमला अपने मासूम तीन बच्चों के साथ न्याय के लिए संघर्ष कर रही है। इस बार सुलतानपुर से लोकसभा के लिए सोनू सिंह को बसपा ने उम्मीदवार बनाया है तो वही सीट गठबंधन के चलते बसपा खाते में जाने एवं सोनू के लड़ने से आहत कमला ने सपा छोड़ दी और शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा से लोकसभा में उम्मीदवार है। कमला की जिद है कि पति के हत्यारे को संसद नही जाने दूँगी।

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