एक लाख रुपए न मिलने पर तीन दिन की अवैध हिरासत के बाद युवक को जेल भेजा, पीड़ित पिता ने लगाई न्याय की गुहार

गाजियाबाद। इस समय जहां एक ओर जिले में पुलिस व प्रशासन चुनावी प्रबंधन की तैयारियों में जुटा हुआ है वहीं साहिबाबाद थाना क्षेत्र की शालीमार गार्डन पुलिस चैकी के कुछ पुलिसकर्मी अपनी जेबें गरम करने के जरिए तलाशने में जुटे है। शालीमार गार्डन में रहने वाले एक पीड़ित ने ऐसे ही आरोप लगाते हुए एसएसपी समेत आलाधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि उसके बेटे को एक लाख रुपए न मिलने पर चैकी पुलिस ने तीन दिन अवैध हिरासत में रखने के बाद फर्जी मुकदमें में जेल भेज दिया है। पीड़ित पिता ने इस मामले में उच्चाधिकारियों ने अविलंब कार्रवाई करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
शालीमार गार्डन के स्वामी विवेकानन्द एंक्लेव में रहने वाले परचून विक्रेता कपिल कुमार गुप्ता ने एसएसपी, आईजी, डीआईजी तथा शासन को भेजे गए शिकायती पत्र में कहा है कि 13 मार्च की दोपहर चैकी प्रभारी हरिओम सिंह, कांस्टेबल केके चैधरी समेत चार पुलिसवाले उनके घर सादी वर्दी में पहुंचे। उस समय वह दुकान पर थे जबकि उनका एक बेटा घर में तथा दूसरा बेटा पड़ोस में था। पुलिसवाले बिना कोई कारण बताए उनके दोनों बेटों प्रदीप और नीरज तथा एक अन्य युवक हुनैन को चैकी पर ले गए। चैकी पहुंचने पर प्रदीप को यह कहते हुए छोड़ दिया गया कि वह एक लाख रुपए लाकर दे, तभी उसके भाई नीरज को छोड़ा जाएगा। अगर यह रकम नहीं मिली तो फर्जी मुकदमों में फंसा उनका जीवन तबाह कर दिया जाएगा।
कपिल कुमार गुप्ता का कहना है कि उक्त पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे प्रदीप को बुरी तरह डराया-धमकाया जिसकी वजह से वह सदमें में है वहीं एक लाख रुपए न मिलने पर उनके दूसरे बेटे नीरज को पुलिसकर्मियों ने तीन दिन तक अवैध हिरासत में रखा और इस बीच पुलिसवाले लगातार एक लाख रुपए की मांग करते रहे। जब पुलिसकर्मियों को यह रकम नहीं मिली तो उन्होंने तीन दिन की अवैध हिरासत के बाद नीरज को फर्जी मुकदमों में जेल भेज दिया। आरोप है कि पुलिसवालों ने नीरज का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया। कपिल कुमार का दावा है कि पुलिसवालों की करतूत की सीसीटीवी फुटेज उनके पास है। जिसके आधार कपिल कुमार ने निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग आलाधिकारियों से की है। न्याय न मिलने की सूरत में पीड़ित पक्ष अदालत की शरण में जाने की बात भी कह रहा है। कपिल कुमार का कहना है कि चैकी प्रभारी हरिओम सिंह, कांस्टेबल केके चैधरी व कुछ पुलिसकर्मी क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम करने के बजाय निर्दोषों को अवैध हिरासत में लेकर उनसे अवैध उगाही करने में मशगूल हैं जिससे लोगों का विश्वास कानून व्यवस्था से उठ रहा है।

कप्तान साहब! अवैध उगाही के लिए शालीमार गार्डन पुलिस ने रिक्शा चालक को भी नहीं बख्शा

साहिबाबाद। बूढ़ा मरे या जवान मुझे हत्या से काम, इस कहावत को इस समय साहिबाबाद थाना क्षेत्र की शालीमार गार्डन पुलिस चैकी के कुछ पुलिसवाले बखूबी अंजाम देते नजर आ रहे हैं। हाल ही में पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिए गए ई-रिक्शा चालक को छोड़ने की एवज में पुलिसवालों ने खुलकर 15 हजार रुपए की मांग कर डाली। काफी गिड़गिड़ाने पर पीड़ित के पिता ने आधी रकम देकर बेटे को पुलिस की कैद से छुड़ाया। अब पीड़ित पक्ष ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग एसएसपी से की है।
एसएसपी को भेजे गए शिकायती पत्र में जवाहर पार्क में रहने वाले इन्तेजामुद््दीन ने कहा है कि वह और उसका बेटा करीमुद्दीन (कल्लू) ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता है। सीमापुरी डिपो के पास 20 मार्च को कांस्टेबल शिवानन्द यादव और कांस्टेबल केके चैधरी ने करीमुद्दीन के ई-रिक्शा से सवारियों को उतारने के बाद करीमुद्दीन के साथ गाली-गलौज की और उस पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाते हुए मारपीट की। दोनों पुलिसकर्मी उसे शालीमार गार्डन पुलिस चैकी ले गए। इसका पता चलने पर पिता इन्तेजामुद्दीन चैकी पहुंचने और अपने बेटे को छोड़ने के लिए पुलिसवालों के सामने गिड़गिड़ाने लगे। लेकिन पुलिसवालों का दिल नहीं पसीजा। चैकी प्रभारी हरिओम सिंह, कांस्टेबल शिवानन्द यादव व कांस्टेबल केके चैधरी ने करीमुद्दीन को छोड़ने की एवज में खुलकर 15 हजार रुपए की मांग की। इतनी रकम देने में मजदूर परिवार असक्षम था, फिर भी जैसे-तैसे उसने आधी रकम का इन्तजाम किया। इन्तेजामुद्दीन का आरोप है कि पुलिसवालों ने 7500 रुपए लेकर उनके बेटे को यह कहते हुए छोड़ा कि अगर किसी से इसकी शिकायत की तो अंजाम बुरा होगा।
पुलिसवालों की धमकियों से सहमे पीड़ित पक्ष ने एसएसपी को शिकायती पत्र भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई करने तथा वसूले गए 7500 रुपए वापस दिलाने की मांग उठाई है। पीड़ित पक्ष ने जान- माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

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